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Atharvaveda - Mantra 8

Atharvaveda 19/10/8

72 Sukta
10 Mantra
19/10/8
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- शान्ति सूक्त
Mantra with Swara
शं नः॒ सूर्य॑ उरु॒चक्षा॒ उदे॑तु॒ शं नो॑ भवन्तु प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः। शं नः॒ पर्व॑ता ध्रु॒वयो॑ भवन्तु॒ शं नः॒ सिन्ध॑वः॒ शमु॑ स॒न्त्वापः॑ ॥

शम्। नः॒। सूर्यः॑। उ॒रु॒ऽचक्षाः॑। उत्। ए॒तु॒। शम्। नः॒। भ॒व॒न्तु॒। प्र॒ऽदिशः॑। चत॑स्रः। शम्। नः॒। पर्व॑ताः। ध्रु॒वयः॑। भ॒व॒न्तु॒। शम्। नः॒।‍ सिन्ध॑वः। शम्। ऊं॒ इति॑। स॒न्तु॒। आपः॑ ॥१०.८॥

Mantra without Swara
शं नः सूर्य उरुचक्षा उदेतु शं नो भवन्तु प्रदिशश्चतस्रः। शं नः पर्वता ध्रुवयो भवन्तु शं नः सिन्धवः शमु सन्त्वापः ॥

शम्। नः। सूर्यः। उरुऽचक्षाः। उत्। एतु। शम्। नः। भवन्तु। प्रऽदिशः। चतस्रः। शम्। नः। पर्वताः। ध्रुवयः। भवन्तु। शम्। नः।‍ सिन्धवः। शम्। ऊं इति। सन्तु। आपः ॥१०.८॥

Meaning
१. (उरुचक्षा:) = विशाल दृष्टि-[प्रकाश]-वाला (सूर्य: नः शम् उदेतु) = सूर्य हमारे लिए शान्तिकर होकर उदित हो। (चतस्त्रः प्रदिश) = चारों विशाल दिशाएँ (नः शं भवन्तु) = हमारे लिए शान्तिकर हों। २. ये (ध्रुवयः) = अपने स्थानों से न डिगनेवाले (पर्वताः नः शं भवन्तु) = पर्वत हमारे लिए शान्तिकर हों।(न:) = हमारे लिए इन पर्वतों से बहनेवाली (सिन्धवः) = नदियाँ (शम्) = शान्ति दें, (उ) = और उन नदियों के (आप:) = जल (शं सन्त) = शान्तिकर हों।
Essence
सूर्य से हम विशाल दृष्टि का पाठ पढ़ें, दिशाओं से विशालहृदयता को सीखें। पर्वतों से ध्रुवता का पाठ पढ़ें। नदियों से निरन्तर गति की शिक्षा लें और जलों से शान्ति का पाठ पढ़ें। इसीप्रकार जीवन शान्त बनेगा।
Subject
सूर्य से आपः तक

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