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Atharvaveda - Mantra 10

Atharvaveda 19/10/10

72 Sukta
10 Mantra
19/10/10
Devata- मन्त्रोक्ताः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- शान्ति सूक्त
Mantra with Swara
शं नो॑ दे॒वः स॑वि॒ता त्राय॑माणः॒ शं नो॑ भवन्तू॒षसो॑ विभा॒तीः। शं नः॑ प॒र्जन्यो॑ भवतु प्र॒जाभ्यः॒ शं नः॒ क्षेत्र॑स्य॒ पति॑रस्तु श॒म्भुः ॥

शम्। नः॒।दे॒वः। स॒वि॒ता। त्राय॑माणः। शम्। नः॒। भ॒व॒न्तु॒। उ॒षसः॑। वि॒ऽभा॒तीः। शम्। नः॒। प॒र्जन्यः॑। भ॒व॒तु॒। प्र॒ऽजाभ्यः॑। शम्। नः॒। क्षेत्र॑स्य। पतिः॑। अ॒स्तु॒। श॒म्ऽभुः ॥१०.१०॥

Mantra without Swara
शं नो देवः सविता त्रायमाणः शं नो भवन्तूषसो विभातीः। शं नः पर्जन्यो भवतु प्रजाभ्यः शं नः क्षेत्रस्य पतिरस्तु शम्भुः ॥

शम्। नः।देवः। सविता। त्रायमाणः। शम्। नः। भवन्तु। उषसः। विऽभातीः। शम्। नः। पर्जन्यः। भवतु। प्रऽजाभ्यः। शम्। नः। क्षेत्रस्य। पतिः। अस्तु। शम्ऽभुः ॥१०.१०॥

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Meaning
१. यह (त्रायमाण:) = हम सबका रक्षण करता हुआ (देव:) = प्रकाशमय (सविता) = सूर्य (न: शम्) = हमारे लिए शान्तिकर हो। ये (विभाती:) = विशेषरूप से दीस होती हुई (उषसः) = उषाएँ (नः शं भवन्तु) = हमारे लिए शान्तिकर हों। २. (नः प्रजाभ्यः) = हमारी सन्तानों के लिए (पर्जन्यः शं भवतु) = मेघ शान्ति देनेवाला हो। (न:) = हमारे लिए (क्षेत्रस्य पति:) = इस ब्रह्माण्डरूप क्षेत्र का स्वामी प्रभु (शम् अस्तु) = शान्तिकर हो।
Essence
सूर्य, उषा, पर्जन्य व ब्रह्माण्डरूप क्षेत्र का स्वामी प्रभु हमें शान्ति प्राप्त कराए।
Subject
त्रायमाण: सविता