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Atharvaveda - Mantra 78

Atharvaveda 18/4/78

4 Sukta
89 Mantra
18/4/78
Devata- आसुरी त्रिष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
स्व॒धापि॒तृभ्यः॑ पृथिवि॒षद्भ्यः॑ ॥

स्व॒धा । पि॒तृऽभ्य॑: । पृ॒थि॒वि॒सत्ऽभ्य॑: ॥४.७८॥

Mantra without Swara
स्वधापितृभ्यः पृथिविषद्भ्यः ॥

स्वधा । पितृऽभ्य: । पृथिविसत्ऽभ्य: ॥४.७८॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (पृथिविषद्भ्य:) = पृथिवीस्थ अग्नि आदि देवों की विद्या में निपुण (पितृभ्यः) = इन ज्ञानप्रद पितरों के लिए (स्वधा) = हम आत्मधारण के लिए पर्यास अन्न प्राप्त कराएँ। २. इसी प्रकार (अन्तरिक्षसभ्यः) = अन्तरिक्षस्थ वायु आदि देवों की विद्या में निपुण (पितृभ्यः) = ज्ञानप्रद पितरों के लिए (स्वधा:) = अन्न प्राप्त कराया जाए और (दिविषद्भ्यः) = लोकस्थ सूर्यादि देवों के ज्ञाता (पितृभ्य:) = पितरों के लिए (स्वधा) = अन्न हो।
Essence
हम 'पृथिवी, अन्तरिक्ष व धुलोकस्थ''अग्नि, वायु व सूर्य' आदि देवों की विद्या में निपुण ज्ञानप्रदाता पितरों के लिए उचित अन्न प्राप्त कराते हुए उनका आदर करें।
Subject
'पृथिवी, अन्तरिक्ष व धुलोक' स्थ पितर