Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 69

Atharvaveda 18/4/69

4 Sukta
89 Mantra
18/4/69
Devata- त्रिष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
उदु॑त्त॒मंव॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मं श्र॑थाय। अधा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तयेस्याम ॥

उत् । उ॒त्ऽत॒मम् । व॒रु॒ण॒ । पाश॑म् । अ॒स्मत् । अव॑ । अ॒ध॒मम् । वि । म॒ध्य॒मम् । श्र॒थ॒य॒ । अध॑ । व॒यम् । आ॒दि॒त्य॒ । व्र॒ते । तव॑ । अना॑गस: । अदि॑तये । स्या॒म॒ ॥४.६९॥

Mantra without Swara
उदुत्तमंवरुण पाशमस्मदवाधमं वि मध्यमं श्रथाय। अधा वयमादित्य व्रते तवानागसो अदितयेस्याम ॥

उत् । उत्ऽतमम् । वरुण । पाशम् । अस्मत् । अव । अधमम् । वि । मध्यमम् । श्रथय । अध । वयम् । आदित्य । व्रते । तव । अनागस: । अदितये । स्याम ॥४.६९॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (वरुण) = सब पाशों का निवारण करनेवाले प्रभो! आप (उत्तमं पाशम्) = सतगुण के उत्कृष्ट "सुखसंग व ज्ञानसंग' रूप पाश को (अस्मत्) = हमसे (उत् प्रथाय) = दूर कर डालिए। (अधम्) = तमोगुण के निकृष्ट 'प्रमाद, आलस्य व निन्द्रा' रूप पाश को अव [श्रथाय]-विनष्ट करिए। (मध्यमम्) = रजोगुण के मध्यम 'कर्मसंग व तृष्णासंग' रूप पाश को भी वि [प्रथाय] विनष्ट करनेवाले होओ। २. हे (आदित्य) = सबका अपने में आदान कर लेनेवाले प्रभो! (अधा) = अब पाशमुक्त होकर (वयम्) = हम (तव व्रते) = आपकी प्राप्ति के व्रत में-आपको प्राप्त करने को ही लक्ष्य बनाकर (अनागस:) = निष्पाप हों और (अदितये स्याम) = न विनाश के लिए हों-अमृतत्व को प्राप्त करें|
Essence
हम प्रभुस्मरण द्वारा सब पाशों को छिन्न करके प्रभु-प्राप्ति को ही जीवन का लक्ष्य बनाएँ। प्रभु-प्राप्ति के व्रत में चलते हुए निष्पाप व नीरोग [अभूत] बनें।
Subject
महान पिता 'वरुण प्रभु द्वारा पाशश्रथन [Killing]