Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 68

Atharvaveda 18/4/68

4 Sukta
89 Mantra
18/4/68
Devata- आसुरी अनुष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
ये॒स्माकं॑पि॒तर॒स्तेषां॑ ब॒र्हिर॑सि ॥

ये । अ॒स्माक॑म् । पि॒तर॑: । तेषा॑म् । ब॒र्हि: । अ॒सि॒ ॥४.६८॥

Mantra without Swara
येस्माकंपितरस्तेषां बर्हिरसि ॥

ये । अस्माकम् । पितर: । तेषाम् । बर्हि: । असि ॥४.६८॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. गृहस्थ को चाहिए कि वह घर को सम्बोधन करता हुआ यही कहे कि हे गृह! (ये) = जो (अस्माकम्) = हमारे (पितर:) = पितर हैं, तू तेषाम्-उनका (बर्हिः असि) = आसन है। समय-समय पर जब कभी वे आएँ तब यहाँ वे आदरपूर्वक बिठाये जाएँ। २. 'बहिंस' का अर्थ [Light] 'प्रकाश' भी है। हमारा घर पितरों के प्रकाशवाला हो। पितरों से दी गई प्रेरणाएँ हमें प्रकाश दें-उस प्रकाश में हम ठीक मार्ग का आक्रमण करनेवाले हों।
Essence
घरों में पितरों का आदर हो। उनकी सत्प्रेरणाएँ हमारे लिए प्रकाश देकर मार्गदर्शन करानेवाली हों।
Subject
घर-पितरों का बर्हि