Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 39

Atharvaveda 18/4/39

4 Sukta
89 Mantra
18/4/39
Devata- पुरोविराट् आस्तार पङ्क्ति Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
पु॒त्रंपौत्र॑मभित॒र्पय॑न्ती॒रापो॒ मधु॑मतीरि॒माः। स्व॒धां पि॒तृभ्यो॑ अ॒मृतं॒दुहा॑ना॒ आपो॑ दे॒वीरु॒भयां॑स्तर्पयन्तु ॥

पु॒त्रम् । पौत्र॑म् । अ॒भि॒ऽत॒र्पय॑न्ती: । आप॑: । मधु॑ऽमती: । इ॒मा: । स्व॒धाम् । पि॒तृऽभ्य॑: । अ॒मृत॑म् । दुहा॑ना: । आप॑: । उ॒भया॑न् । त॒र्प॒य॒न्तु॒ ॥ ४.३९॥

Mantra without Swara
पुत्रंपौत्रमभितर्पयन्तीरापो मधुमतीरिमाः। स्वधां पितृभ्यो अमृतंदुहाना आपो देवीरुभयांस्तर्पयन्तु ॥

पुत्रम् । पौत्रम् । अभिऽतर्पयन्ती: । आप: । मधुऽमती: । इमा: । स्वधाम् । पितृऽभ्य: । अमृतम् । दुहाना: । आप: । उभयान् । तर्पयन्तु ॥ ४.३९॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (पुत्रं पौत्रम् अभितर्पयन्ती:) = पुत्रों व पौत्रों को प्रीणित करती हुई-उनके लिए सब आवश्यक पदार्थों को प्राप्त कराने के द्वारा उन्हें सदा प्रसन्न रखती हुई (इमाः आप:) = ये प्रजाएँ (मधमती:) = अतिशयेन मधुर जीवनवाली होती हैं। सन्तानों के उत्तम होने पर माता-पिता का जीवन तो आनन्दमय होता ही है। २. (पितृभ्यः) = अपने बड़े माता-पिता के लिए (स्वधाम्) = अन्नों को व (अमृतम्) = नीरोगता को (दुहाना:) = प्रपूरित करती हुई (देवीः आप:) = प्रकाशमय जीवनवाली स्वाध्यायशील प्रजाएँ (उभयान्) = एक और पुत्र-पौत्रों को तथा दूसरी ओर माता-पिता आदि बड़ों को (तर्पयन्तु) = प्रीणित करनेवाली हों।
Essence
युवा गृहस्थों का कर्तव्य है कि वे सन्तानों का समुचित पालन व शिक्षण करें तथा बड़ों की भोजनादि की व्यवस्था को ठीक रखते हुए उन्हें नीरोग बनाएँ। यही जीवन को मधुर व प्रकाशमय बनाने का मार्ग है।
Subject
सन्तान पालन व वृद्धपूजन