Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 70

Atharvaveda 18/3/70

4 Sukta
73 Mantra
18/3/70
Devata- त्रिष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
पुन॑र्देहिवनस्पते॒ य ए॒ष निहि॑त॒स्त्वयि॑। यथा॑ य॒मस्य॒ साद॑न॒ आसा॑तै वि॒दथा॒ वद॑न्॥

पुन॑: । दे॒हि॒ । व॒न॒स्प॒ते॒ । य: । ए॒ष: । निऽहि॑त: । त्वयि॑ । यथा॑ । य॒मस्य॑ । सद॑ने । आसा॑तै । वि॒दथा॑ । वद॑न् ॥३.७०॥

Mantra without Swara
पुनर्देहिवनस्पते य एष निहितस्त्वयि। यथा यमस्य सादन आसातै विदथा वदन्॥

पुन: । देहि । वनस्पते । य: । एष: । निऽहित: । त्वयि । यथा । यमस्य । सदने । आसातै । विदथा । वदन् ॥३.७०॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे वनस्पते प्रकाश की किरणों के स्वामिन् प्रभो। (यः एष:) = जो यह मुक्त जीव (त्वयि निहित:) = शरीर को छोड़कर आपमें निहित हुआ है, इसे (पुनः देहि:) = फिर हमारे लिए प्रास कराइए। २. (यथा) = जिससे (यमस्य सादने) = उस सर्वनियन्ता आपके आश्रय में रहता हुआ (विदथा वदन्) = हमारे लिए ज्ञानों का उपदेश करता हुआ (आसातै) = आसीन हो।
Essence
मुक्तात्मा इस संसार में पुन: आएँ और प्रभु के आश्रय में निवास करते हुए वे हमारे लिए ज्ञानोपदेश करें।
Subject
मुक्तात्मा का ज्ञानोपदेश के लिए समय-समय पर आना