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Atharvaveda - Mantra 60

Atharvaveda 18/3/60

4 Sukta
73 Mantra
18/3/60
Devata- त्र्यवसाना षट्पदा जगती Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
शं॑ ते नीहा॒रोभ॑वतु॒ शं ते॑ प्रु॒ष्वाव॑ शीयताम्। शीति॑के॒ शीति॑कावति॒ ह्लादि॑के॒ह्लादि॑कावति। म॑ण्डू॒क्यप्सु शं भु॑व इ॒मं स्वग्निं श॑मय ॥

शम् । ते॒ । नी॒हा॒र: । भ॒व॒तु॒ । शम् । ते॒ । प्रु॒ष्वा । अव॑ । शी॒य॒ता॒म् । शीति॑के । शीति॑काऽवति । ह्लादि॑के । ह्लादि॑काऽवति । म॒ण्डू॒की । अ॒प्ऽसु । शम् । भु॒व॒: । इ॒मम् । सु । अ॒ग्निम् । श॒म॒य॒ ॥३.६०॥

Mantra without Swara
शं ते नीहारोभवतु शं ते प्रुष्वाव शीयताम्। शीतिके शीतिकावति ह्लादिकेह्लादिकावति। मण्डूक्यप्सु शं भुव इमं स्वग्निं शमय ॥

शम् । ते । नीहार: । भवतु । शम् । ते । प्रुष्वा । अव । शीयताम् । शीतिके । शीतिकाऽवति । ह्लादिके । ह्लादिकाऽवति । मण्डूकी । अप्ऽसु । शम् । भुव: । इमम् । सु । अग्निम् । शमय ॥३.६०॥

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1 Bhashyas
Meaning
२.है पुरुष! (ते) = तेरे लिए (नीहारः शं भवतु) = कोहरा शान्ति देनेवाला हो। (पुष्वा) = जल बिन्दुओं के फुहार भी (ते) = तेरे लिए (शं) = शान्तिकर होकर (अवशीयताम्) = भूमि पर गिरें। हे (शीतिके) = शीतवीर्य ओषधे! (शीतिकावति) = तू शीतवीर्यवाली होती हुई शरीर से उत्तेजना को दूर करके शान्ति को जन्म देती है। हे (ह्लादिकावति) = शरीर में उत्तम धातुओं को जन्म देकर अह्राद को बढ़ानेवाली (ह्लादिके) = हादिका नामवाली ओषधे! तू (मण्डूकी) = मण्डूकी है-शरीर को उत्तम धातुओं से मण्डित करनेवाली है। २. तू (अप्सु) = रेतःकणों के निमित्त (शंभुवः) = शान्ति को पैदा करनेवाली हो। सब प्रकार की उत्तेजना को समाप्त करके तू रेत:कणों के रक्षण का साधन बन। (इमम् अग्निं सुशमय) = तू इस कामानि को शान्त करनेवाली हो। कामाग्नि की शान्ति के द्वारा ही तू रेत:कणों में उबाल को समाप्त करेगी और इसप्रकार रेत:कणों का रक्षण करने में सहायक बनेगी। सुरक्षित रेत:कण शरीर को 'स्वास्थ्य-नैर्मल्य व ज्ञानदीति' से अलंकृत करेंगे।
Essence
हमारे लिए नीहार व जलबिन्दुप्रपात शान्तिकर हों। 'मण्डूकी' नामक ओषधि उत्तेजना को दूर करके हमें शान्त बनाए। उत्तम धातुओं को जन्म देकर हमें आनन्दयुक्त करे। हमें रेत:कणों के रक्षण के द्वारा 'स्वास्थ्य, नैर्मल्य व ज्ञानदीति' से मण्डित करनेवाली यह 'मण्डूकी' इस अन्वर्थ नामवाली हो।
Subject
मण्डूकपर्णी