Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 31

Atharvaveda 18/1/31

4 Sukta
61 Mantra
18/1/31
Devata- त्रिष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
अर्चा॑मि वां॒वर्धा॒यापो॑ घृतस्नू॒ द्यावा॑भूमी शृणु॒तं रो॑दसी मे। अहा॒ यद्दे॒वाअसु॑नीति॒माय॒न्मध्वा॑ नो॒ अत्र॑ पि॒तरा॑ शिशीताम् ॥

अर्चा॑मि । वा॒म् । वर्धा॑य । अप॑: । घृ॒त॒स्नू॒ इति॑ घृतऽस्नू । द्यावा॑भूमी॒ इति॑ । शृ॒णु॒तम् । रो॒द॒सी॒ इति॑ । मे॒ । अहा॑ । यत् । दे॒वा: । असु॑ऽनीतिम् । आय॑न् । मध्वा॑ । न॒: । अत्र॑ । पि॒तरा॑ । शि॒शी॒ता॒म् ॥१.३१॥

Mantra without Swara
अर्चामि वांवर्धायापो घृतस्नू द्यावाभूमी शृणुतं रोदसी मे। अहा यद्देवाअसुनीतिमायन्मध्वा नो अत्र पितरा शिशीताम् ॥

अर्चामि । वाम् । वर्धाय । अप: । घृतस्नू इति घृतऽस्नू । द्यावाभूमी इति । शृणुतम् । रोदसी इति । मे । अहा । यत् । देवा: । असुऽनीतिम् । आयन् । मध्वा । न: । अत्र । पितरा । शिशीताम् ॥१.३१॥

Meaning
१. (अपः वर्धाय) = कर्मों के वर्धन के लिए (वाम्) = आप दोनों-द्युलोक व पृथिवीलोक [मस्तिष्क व शरीर] को (अर्चामि) = पूजित करता हूँ। मेरा मस्तिष्क व शरीर (घृतस्नू) = घृत का धारण करनेवाले हों। मस्तिष्क में ज्ञान की दीप्ति हो [घृत-दीप्ति] और शरीर से मलों का क्षरण हो जाए [ क्षरणे]। (मे द्यावाभूमि) = मेरा ज्ञानदीप्त मस्तिष्क तथा क्षरित मलोंवाला शरीर (रोदसी) = [क्रन्दसी] प्रभु का आह्वान करनेवाले होते हुए (भृणुतम्) = प्रभु की प्रेरणा को सुननेवाले बनें। २. (यत्) = जब (देवा:) = ज्ञानी स्तोता [दिव द्युतौ-स्तुती] (आहा) = प्रतिदिन (असुनीतिम् आयन) = प्राणों के मार्ग पर चलते हैं, अर्थात् प्राणसाधना द्वारा प्राणशक्ति का वर्धन करते हैं तब (अत्र) = इस जीवन में (न:) = हमें (पितरा) = द्यावापृथिवी [मस्तिष्क व शरीर] (मध्वा) = माधुर्य से (शिशीताम्) = संस्कृत कर दें। हमारी प्रत्येक क्रिया माधुर्यपूर्ण हो, हमारा ज्ञान भी मधुरता से औरों तक पहुँचाया जाए। वस्तुतः द्यावाभूमी का माधुर्य से पूर्ण होना ही जीवन के विकास की पराकाष्ठा है। इनको ऐसा बनाना ही इनका अर्चन है।
Essence
हमारे मस्तिष्क व शरीर ज्ञानदीप्त व निर्मल हों। हम प्राणरक्षण के मार्ग से चलें तथा अपने को मधुर बनाएँ।
Subject
द्यावाभूमि का माधुर्य

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.