Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 30

Atharvaveda 18/1/30

4 Sukta
61 Mantra
18/1/30
Devata- त्रिष्टुप् Rishi- यम, मन्त्रोक्त Chhanda- अथर्वा Suktam- पितृमेध सूक्त
Mantra with Swara
दे॒वोदे॒वान्प॑रि॒भूरृ॒तेन॒ वहा॑ नो ह॒व्यं प्र॑थ॒मश्चि॑कि॒त्वान्। धू॒मके॑तुःस॒मिधा भाऋजीको म॒न्द्रो होता॒ नित्यो॑ वा॒चा यजी॑यान् ॥

दे॒व: । दे॒वान् । प॒रि॒ऽभू: । ऋ॒तेन॑ । वह॑ । न॒: । ह॒व्यम् । प्र॒थ॒म: । चि॒कि॒त्वान् । धू॒मऽके॑तु: । स॒म्ऽइधा॑ । भा:ऽऋ॑जीक: । म॒न्द्र: । होता॑ । नित्य॑: । वा॒चा । यजी॑यान् ॥१.३०॥

Mantra without Swara
देवोदेवान्परिभूरृतेन वहा नो हव्यं प्रथमश्चिकित्वान्। धूमकेतुःसमिधा भाऋजीको मन्द्रो होता नित्यो वाचा यजीयान् ॥

देव: । देवान् । परिऽभू: । ऋतेन । वह । न: । हव्यम् । प्रथम: । चिकित्वान् । धूमऽकेतु: । सम्ऽइधा । भा:ऽऋजीक: । मन्द्र: । होता । नित्य: । वाचा । यजीयान् ॥१.३०॥

Meaning
१. प्रभु ऋत व सत्य का पालन करनेवाले जीव से कहते हैं कि (देव:) = देववृत्तिवाला तू (तेन) = यज्ञ के पालन से (देवान् परिभूः) = सब दिव्यगुणों को शरीर में चतुर्दिक भावित करनेवाला हो। तेरे शरीर में यथास्थान उस-उस देवता की स्थिति हो। तू (प्रथमः) = शरीर व मस्तिष्क को उत्तम बनानेवालों में सर्वाग्रणी व (चिकित्वान्) = समझदार होता हुआ (नः) = हमारे (हव्यम्) = हव्य को वहा-वहन करनेवाला हो, अर्थात् तेरा जीवन यज्ञमय हो-त सदा यज्ञशेष का सेवन करनेवाला बन। २. (धूमकेतः) = ज्ञान के द्वारा वासनाओं को कम्पित करके अपने से दूर करनेवाला तू बन। (समिधा भाञ्जीक:) = ज्ञान की दीप्ति से दीप्ति का अर्जन करनेवाला तू हो। (मन्द्रः) = तेरा जीवन सदा प्रसन्नतापूर्ण हो। (नित्यः होता) = तू सदा देनेवाला बन। जितना हम देते हैं-त्याग करते हैं, उतना ही तो जीवन आनन्दमय बनता है। वाचा (यजीयान्) = ज्ञान की वाणी से तू उस प्रभु का पूजन करनेवाला बन । अथवा ज्ञान की वाणियों से संग करनेवाला बन-सदा स्वाध्यायशील हो।
Essence
प्रभु का आदेश है कि हे जीव! तू दिव्यगुणों को धारण कर, यज्ञशील हो, ज्ञान के द्वारा वासनाओं को कम्पित करनेवाला हो, ऋजु, दीप्त, सदा प्रसन्न, नित्य होता व स्वाध्यायशील बना |
Subject
प्रथमः चिकित्वान्

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.