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Atharvaveda - Mantra 25

Atharvaveda 17/1/25

1 Sukta
30 Mantra
17/1/25
Devata- अनुष्टुप् Rishi- आदित्य Chhanda- ब्रह्मा Suktam- अभ्युदयार्थप्रार्थना सूक्त
Mantra with Swara
आदि॑त्य॒नाव॒मारु॑क्षः श॒तारि॑त्रां स्व॒स्तये॑। अह॒र्मात्य॑पीपरो॒ रात्रिं॑ स॒त्राति॑पारय ॥

आदि॑त्य । नाव॑म् । आ । अ॒रु॒क्ष॒: । श॒त॒ऽअरि॑त्राम् । स्व॒स्तये॑ । अह॑:। मा॒ । अति॑ । अ॒पी॒प॒र॒: । रात्रि॑म् । स॒त्रा । अति॑ । पा॒र॒य॒ ॥१.२५॥

Mantra without Swara
आदित्यनावमारुक्षः शतारित्रां स्वस्तये। अहर्मात्यपीपरो रात्रिं सत्रातिपारय ॥

आदित्य । नावम् । आ । अरुक्ष: । शतऽअरित्राम् । स्वस्तये । अह:। मा । अति । अपीपर: । रात्रिम् । सत्रा । अति । पारय ॥१.२५॥

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Meaning
१. हे (आदित्य) = सबका अपने में आदान करनेवाले प्रभो ! (नावम्) = भवसागर को पार करने के लिए नौकारूप जो आप हैं, उनपर (आरुक्षः) [आरोहम्] = मैंने आरोहण किया है। उस नाव पर जोकि (शतारित्राम्) = सैकड़ों चप्पुओंवाली है। प्रभु के रक्षासाधन अनेक हैं। (स्वस्तये) = कल्याण के लिए मैंने इस नाव पर आरोहण किया है। २. हे प्रभो! (अहः मा अति) = अपीपर:-दिन में सब अपत्तियों के परिहारपूर्वक मुझे आपने पार किया है तथा (सत्रा) = साथ ही, दिन के साथ मध्य में व्यवधान न करके (रात्रिं अतिपारय) = रात में भी पार ले-चलिए।
Essence
प्रभुरूप नाव पर आरोहण करके हम दिन-रात, सब आपत्तियों से रहित होते हुए भवसागर को तैरते चलें।
Subject
प्रभुरूप नाव