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Atharvaveda - Mantra 22

Atharvaveda 17/1/22

1 Sukta
30 Mantra
17/1/22
Devata- द्विपदा अनुष्टुप् Rishi- आदित्य Chhanda- ब्रह्मा Suktam- अभ्युदयार्थप्रार्थना सूक्त
Mantra with Swara
उ॑द्य॒ते नम॑उदाय॒ते नम॒ उदि॑ताय॒ नमः॑। वि॒राजे॒ नमः॑ स्व॒राजे॒ नमः॑ स॒म्राजे॒ नमः॑॥

उ॒त्ऽय॒ते । नम॑: । उ॒त्ऽआ॒य॒ते । नम॑: । उत्ऽइ॑ताय । नम॑: । वि॒ऽराजे॑ । नम॑: । स्व॒ऽराजे॑ । नम॑: । स॒म्ऽराजे॑ । नम॑: ॥१.२२॥

Mantra without Swara
उद्यते नमउदायते नम उदिताय नमः। विराजे नमः स्वराजे नमः सम्राजे नमः॥

उत्ऽयते । नम: । उत्ऽआयते । नम: । उत्ऽइताय । नम: । विऽराजे । नम: । स्वऽराजे । नम: । सम्ऽराजे । नम: ॥१.२२॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (उद्यते) = उदय होते हुए ज्ञानसूर्य के लिए (नमः) = नमस्कार हो, (उदायते) = कुछ उदित हो गये इस ज्ञानसूर्य के लिए (नमः) = नमस्कार हो और (उदिताय) = उदित हुए इस ज्ञानसूर्य के लिए (नमः) = नमस्कार हो। २. 'उद्यन्' प्रकृतिविज्ञान सूर्यवाले (विराजे) = अतएव विशिष्टरूप से दीप्त होनेवाले इस पुरुष के लिए (नमः) = हम आदर देते हैं। उदायत् ज्ञानसूर्यवाले इस (स्वराजे) = आत्मज्ञान की दीप्ति से दीप्त पुरुष के लिए (नमः) = हम प्रणाम करते हैं। उदित ब्रह्मज्ञान सूर्यवाले इस (सम्राजे) = सम्यक् दीप्त पुरुष के लिए (नम:) = हम नमस्कार करते हैं। ३. उद्यन् ज्ञानसूर्य के होने पर इस (अस्तंयते) = अस्त को जाते हुए वासनान्धकार के लिए हम (नमः) = प्रभु के प्रति नमन करते हैं। 'उदायत्' ज्ञानसूर्य के होने पर (अस्तम् एष्यते) = कुछ अस्त हो गये वासनान्धकार के लिए (नमः) = हम प्रभु का नमन करते हैं और 'उदित' ज्ञानसूर्य के होने पर अस्तमिताय-अस्त हो गये वासनान्धकार के लिए (नम:) = हम प्रभु का नमन करते हैं। अस्त को जाते हए वासनान्धकार के होने पर (विराजे) = विशिष्ट दीसिवाले इस पुरुष के लिए (नमः) = आदर हो। कुछ अस्त हो गये बासनान्धकारवाले इस (स्वराजे) = आत्मदीप्तिवाले पुरुष के लिए (नमः) = नमस्कार हो। अस्तमिताय अस्त हुए वासनान्धकारवाले इस (सम्राजे) = सम्यक् दीप्स पुरुष के लिए नमः नमस्कार हो।
Essence
हम ज्ञानसूर्य के उदय के द्वारा बासनान्धकार के विलय के लिए यत्नशील हों, तभी हम विशिष्ट दीसिवाले [विराट], आत्मदीसिवाले [स्वराट्] व सम्यक् दीप्तिवाले [सम्राट्] बन पाएंगे।
Subject
ज्ञानोदय अन्धकारविलय