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Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 16/6/2

9 Sukta
11 Mantra
16/6/2
Devata- प्राजापत्या अनुष्टुप् Rishi- उषा,दुःस्वप्ननासन Chhanda- यम Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
उ॒षोयस्मा॑द्दुः॒ष्वप्न्या॒दभै॒ष्माप॒ तदु॑च्छतु ॥

उष॑: । यस्मा॑त् । दु॒:ऽस्वप्न्या॑त् । अभै॑ष्म । अप॑ । तत् । उ॒च्छ॒तु॒ ॥६.२॥

Mantra without Swara
उषोयस्माद्दुःष्वप्न्यादभैष्माप तदुच्छतु ॥

उष: । यस्मात् । दु:ऽस्वप्न्यात् । अभैष्म । अप । तत् । उच्छतु ॥६.२॥

Meaning
१. हे (उष:) = सब अन्धकारों का दहन करनेवाली उषे! (यस्मात्) = जिस (दु:ष्वप्न्यात्) = दुष्ट स्वप्नों के कारणभूत 'ग्राही, दुर्गति, अशक्ति, अनैश्वर्य, पराजय व इन्द्रियों की विषय-परायणता' आदि से (अभैष्म) = हम भयभीत होते हैं, (तत्) = वह सब (अप उच्छतु) = हमसे दूर हो।
Essence
'उषाकाल में जाग जाना' स्वयं दुष्ट स्वप्नों से हमें बचाता है। दुष्ट स्वप्नों की कारणभूत दुर्गति आदि भी हमसे दूर हों।
Subject
दुःष्वप्नों का दूरीकरण

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