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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 16/4/6

9 Sukta
7 Mantra
16/4/6
Devata- आर्ची उष्णिक् Rishi- आदित्य Chhanda- ब्रह्मा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
स्व॒स्त्यद्योषसो॑ दो॒षस॑श्च॒ सर्व॑ आपः॒ सर्व॑गणो अशीय ॥

स्व॒स्ति । अ॒द्य: । उ॒षस॑: । दो॒षस॑: । च॒ । सर्व॑: । आ॒प॒: । सर्व॑ऽगण: । अ॒शी॒य॒ ॥४.६॥

Mantra without Swara
स्वस्त्यद्योषसो दोषसश्च सर्व आपः सर्वगणो अशीय ॥

स्वस्ति । अद्य: । उषस: । दोषस: । च । सर्व: । आप: । सर्वऽगण: । अशीय ॥४.६॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (अद्य) = आज, हे (आपः) = शरीरस्थ रेत:कणरूप जलो! (उषसः दोषस: च) = दिनों व रात्रियों में-दिन के आरम्भ से दिन की समाप्ति तक-(सर्व:) = [whole] सब पूर्ण अङ्गोंवाला, अर्थात् स्वस्थ होता हुआ तथा (सर्वगणा:) = 'पंचभूतों के गण, पाँच प्राणों के गण, पाँच कर्मेन्द्रियों के गण, पाँच ज्ञानेन्द्रियों के गण' तथा 'मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार व हृदय' रूप अन्त:करण पञ्चकवाला मैं (स्वस्ति अशीय) = कल्याण को प्राप्त करूँ।
Essence
गतमन्त्र के अनुसार प्राणसाधना के होने पर, वासनारूप दोषों के दूर होने से, शरीर में रेत:कणों का रक्षण होगा। इनके रक्षण से हम स्वस्थ होंगे, हमारे शरीरस्थ सब पञ्चक बड़े ठीक होंगे। तब प्रातः से सायं तक सारा दिन हम कल्याण-ही-कल्याण का अनुभव करेंगे।
Subject
सर्वः सर्वगणाः