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Atharvaveda - Mantra 5

Atharvaveda 16/4/5

9 Sukta
7 Mantra
16/4/5
Devata- आसुरी गायत्री Rishi- आदित्य Chhanda- ब्रह्मा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
प्राणा॑पानौ॒ मामा॑ हासिष्टं॒ मा जने॒ प्र मे॑षि ॥

प्राणा॑पानौ । मा । मा॒ । हा॒सि॒ष्ट॒म् । मा । जने॑ । प्र । मे॒षि॒ ॥४.५॥

Mantra without Swara
प्राणापानौ मामा हासिष्टं मा जने प्र मेषि ॥

प्राणापानौ । मा । मा । हासिष्टम् । मा । जने । प्र । मेषि ॥४.५॥

Meaning
१. (प्राणापानौ) = प्राण और अपान (मा) = मुझे (मा हासिष्टं) = मत छोड़ जाएँ। मैं सदा प्राणापान की साधना करनेवाला बनूं। प्राण की अपान में तथा अपान की प्राण में आहुति देता हुआ प्राणापान यज्ञ को करनेवाला बनूं। २. इस साधना को करता हुआ मैं (जने) = मनुष्य के विषय में (मा) = मत (प्रमेषि) = भ्रान्त [goastray] हो जाऊँ, अर्थात् मनुष्यों के विषय में किसी प्रकार की गलती न करूँ। सदा मानवोचित कार्य ही करनेवाला बनूं।
Essence
हम प्राणसाधना में प्रवृत्त रहते हुए इन्द्रिय-दोषों को दूर करनेवाले बनें 'तथेन्द्रियाणां दह्यन्ते दोषाः प्राणस्य निग्रहात्।
Subject
प्राणसाधना द्वारा दोषदहन

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