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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 16/2/4

9 Sukta
6 Mantra
16/2/4
Devata- त्रिपदा प्रतिष्ठार्ची Rishi- वाक् Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
सु॒श्रुतौ॒कर्णौ॑ भद्र॒श्रुतौ॒ कर्णौ॑ भ॒द्रं श्लोकं॑ श्रूयासम् ॥

सु॒ऽश्रुतौ॑ । कर्णौ॑ । भ॒द्र॒ऽश्रुतौ॑ । कर्णौ॑ । भ॒द्रम् । श्लोक॑म् । श्रू॒या॒स॒म् ॥२.४॥

Mantra without Swara
सुश्रुतौकर्णौ भद्रश्रुतौ कर्णौ भद्रं श्लोकं श्रूयासम् ॥

सुऽश्रुतौ । कर्णौ । भद्रऽश्रुतौ । कर्णौ । भद्रम् । श्लोकम् । श्रूयासम् ॥२.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे प्रभो! आपके अनुग्रह से (कर्णौ सुश्रुतौ) = मेरे कान उत्तम श्रवणशक्ति से सम्पन्न हों। श्रवणशक्ति में किसी प्रकार की कमी न हो जाए। ये (कर्णौ) = कान (भद्रश्रुतौ) = सदा भद्र बातों को ही सुननेवाले हों। श्रवणशक्ति का प्रयोग सदा कल्याणी वाणियों के श्रवण के लिए ही हो। २. हे प्रभो! आपका स्मरण करता हुआ मैं सदा (भद्रं श्लोकम्) = कल्याणकर पद्यों को ही (श्रुयासम्) = सुनूं। ज्ञान की शुभवाणियाँ ही मेरे कानों का विषय बनें। ('भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवाः')
Essence
प्रभुकृपा से हमारे कानों की शक्ति ठीक बनी रहे और हम उनसे सदा भद्र वाणियों का ही श्रवण करें।
Subject
भद्र-श्रवण