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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 16/2/3

9 Sukta
6 Mantra
16/2/3
Devata- साम्नी उष्णिक् Rishi- वाक् Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
उप॑हूतो मेगो॒पा उप॑हूतो गोपी॒थः ॥

उप॑ऽहूत: । मे॒ । गो॒पा: । उप॑ऽहूत: । गो॒पी॒थ: ॥२.३॥

Mantra without Swara
उपहूतो मेगोपा उपहूतो गोपीथः ॥

उपऽहूत: । मे । गोपा: । उपऽहूत: । गोपीथ: ॥२.३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. जीवन को ठीक बनाये रखने के लिए (मे) = मेरे द्वारा (गोपा:) = वह इन्द्रियों का रक्षक प्रभु (उपहूतः) = पुकारा गया है। मैं प्रभु की आराधना करता है और इसप्रकार अपनी इन्द्रियों को विषयों से बद्ध नहीं होने देता। इसी उद्देश्य से (गोपीथ:) = [पीथ:-drink] ज्ञान की वाणियों का पान (उपहूतः) = पुकारा गया है। मैं ज्ञान की वाणियों के पान के लिए प्रार्थना करता हूँ। 'प्रभु-स्मरण वज्ञान की वाणियों का पान' ये ही दो साधन हैं, जो मेरे जीवन को मधुर बनाते हैं।
Essence
हम प्रभु का आराधन करें और ज्ञान की वाणियों के पान में तत्पर रहें। इसप्रकार हम अपने जीवन को मधुर बना पाएँ।
Subject
गोपा:-गोपीथः