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Atharvaveda - Mantra 9

Atharvaveda 16/1/9

9 Sukta
13 Mantra
16/1/9
Devata- आसुरी पङ्क्ति Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
इन्द्र॑स्य वइन्द्रि॒येणा॒भि षि॑ञ्चेत् ॥

इन्द्र॑स्य । व॒: । इ॒न्द्रि॒येण॑ । अ॒भि । सि॒ञ्चे॒त् ॥१.९॥

Mantra without Swara
इन्द्रस्य वइन्द्रियेणाभि षिञ्चेत् ॥

इन्द्रस्य । व: । इन्द्रियेण । अभि । सिञ्चेत् ॥१.९॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. उल्लिखित मन्त्र के अनुसार कामाग्नि का शमन (व:) = तुम्हें (इन्द्रस्य) = एक जितेन्द्रिय पुरुष के (इन्द्रियेण) = वीर्य व बल से (अभिषिञ्चेत्) = सित करे। कामाग्नि के शमन से शरीर में शक्ति सुरक्षित रहती है। यह शक्ति प्रत्येक इन्द्रिय को उस-उस सामर्थ्य से सम्पन्न करती है।
Essence
हम कामानि को शान्त करके वीर्यरक्षण द्वारा इन्द्रियों को शक्ति-सम्पन्न बनाएँ।
Subject
इन्द्र का इन्द्रिय से अभिषेचेन