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Atharvaveda - Mantra 6

Atharvaveda 16/1/6

9 Sukta
13 Mantra
16/1/6
Devata- साम्नी अनुष्टुप् Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
अ॒पामग्र॑मसिसमु॒द्रं वो॒ऽभ्यव॑सृजामि ॥

अ॒पाम् । अग्र॑म् । अ॒सि॒ । स॒मु॒द्रम् । व॒: । अ॒भि॒ऽअव॑सृजामि ॥१.६॥

Mantra without Swara
अपामग्रमसिसमुद्रं वोऽभ्यवसृजामि ॥

अपाम् । अग्रम् । असि । समुद्रम् । व: । अभिऽअवसृजामि ॥१.६॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. काम को जीतने के लिए दो मार्ग हैं। उन्हीं का संकेत प्रभु इस रूप में करते हैं कि (अपाम् अग्रम् असि) = [अप् कर्म] तू कर्मों के अग्रभाग में है, अर्थात् कर्मशील पुरुषों का मुखिया है तथा (वः) = तुम्हें (समुद्रम् अभि) = ज्ञान के समुद्र की ओर (अवसृजामि) = भेजता है, अर्थात् तुम अपना सारा खाली समय ज्ञान-प्राप्ति में ही लगाने का ध्यान करो। ज्ञान अनन्त है। [अनन्तपारं किल शब्दशास्त्रम्]। ज्ञानप्राप्ति में लगे रहने पर काम ज्ञानग्नि में भस्म ही हो जाएगा। कर्मों में लगे रहने से काम को हमपर आक्रमण का अवसर ही न मिलेगा।
Essence
कामवासना से आक्रान्त न होने का सुन्दरतम उपाय यही है कि हम कर्मों में लगे रहें तथा सारे खाली समय का उपयोग ज्ञान-प्राप्ति में करें।
Subject
कर्म+ज्ञान