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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 16/1/4

9 Sukta
13 Mantra
16/1/4
Devata- आसुरी गायत्री Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
इ॒दं तमति॑सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ॥

इ॒दम् । तम् । अति॑ । सृ॒जा॒मि॒ । तम् । मा । अ॒भि॒ऽअव॑निक्षि ॥१.४॥

Mantra without Swara
इदं तमतिसृजामि तं माभ्यवनिक्षि ॥

इदम् । तम् । अति । सृजामि । तम् । मा । अभिऽअवनिक्षि ॥१.४॥

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Meaning
१. (इदम्) = [इदानीम्] अब मैं (तम्) = शरीर व मन को दूषित करनेवाले उस काम को (अतिसुजामि) = सुदूर छोड़ता है। (तम्) = उस 'काम' को मैं (मा) = मत (अभ्यवनिक्षि) = परिचुम्बित करूँ [निक्ष to kiss] | इस कामवासना के प्रति मेरा स्नेह न हो। इसे अपना सर्वमहान् शत्रु जानकर मैं इसे नष्ट करनेवाला बनें।
Essence
शरीर व मन को दूषित करनेवाली इस कामवासना को हम दूर से ही प्रणाम करें।
Subject
'काम' विनाश