Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 2

Atharvaveda 16/1/2

9 Sukta
13 Mantra
16/1/2
Devata- याजुषी त्रिष्टुप् Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
रु॒जन्प॑रिरु॒जन्मृ॒णन्प्र॑मृ॒णन् ॥

रु॒जन् । प॒रि॒ऽरु॒जन् । मृ॒णन् । प्र॒ऽमृ॒णन् ॥१.२॥

Mantra without Swara
रुजन्परिरुजन्मृणन्प्रमृणन् ॥

रुजन् । परिऽरुजन् । मृणन् । प्रऽमृणन् ॥१.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. माता, पिता व आचार्यों की प्रेरणाओं को न सुनने पर तथा प्रभु-ध्यान को छोड़ने से जीवन की स्थिति विकृत और अतिविकृत हो गई। (रुजन्) = मैंने अपने शरीर को रुग्ण कर लिया। (परिरुजन्) = शरीर के अङ्ग-प्रत्यङ्ग में मैं शक्तिभंग का कारण बना । जीवन के विलासमय हो जाने से शक्ति-विनाश तो होना ही था। २. (मृणन्) = [to slay] मैं मन के सब उत्तमभावों का हिंसन करनेवाला बना। (प्रमृणन्) = मैंने दिव्यभावों को पूर्णतया नष्ट ही कर डाला।
Essence
प्रभु के ध्यान से तथा 'माता पिता व आचार्य की प्रेरणा से दूर होने पर शरीर व्याधियों का तथा मन आधियों का शिकार हो जाता है।
Subject
रुजन्-मृणन्