Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 12

Atharvaveda 16/1/12

9 Sukta
13 Mantra
16/1/12
Devata- आर्ची अनुष्टुप् Rishi- प्रजापति Chhanda- अथर्वा Suktam- दुःख मोचन सूक्त
Mantra with Swara
शि॒वेन॑ मा॒चक्षु॑षा पश्यतापः शि॒वया॑ त॒न्वोप॑ स्पृशत॒ त्वचं॑ मे ॥

शि॒वेन॑ । मा॒ । चक्षु॑षा । प॒श्य॒त॒ । आ॒प॒: । शि॒वया॑ । त॒न्वा᳡ । उप॑ । स्पृ॒श॒त॒ । त्वच॑म् । मे॒ ॥१.१२॥

Mantra without Swara
शिवेन माचक्षुषा पश्यतापः शिवया तन्वोप स्पृशत त्वचं मे ॥

शिवेन । मा । चक्षुषा । पश्यत । आप: । शिवया । तन्वा । उप । स्पृशत । त्वचम् । मे ॥१.१२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (आप:) = शरीर में सुरक्षित रेत:कणो! तुम (मा) = मुझे (शिवेन चक्षुषा पश्यत्) = कल्याणकारिणि दृष्टि से देखो। तुम्हारे द्वारा मेरा कल्याण हो-मेरी चक्षु आदि सब इन्द्रियाँ ठीक बनी रहें। यही तो 'सु-ख' है- इन्द्रियों का [ख] उत्तम होना [सु]। २. हे आप! तुम (मे त्वचम्) = मेरी त्वचा को (शिवया तन्वा) = कल्याणयुक्त शरीर से (उपस्पृशत) = स्पृष्ट करो, अर्थात् इन सुरक्षित रेत:कणों द्वारा मेरा शरीर कल्याणयुक्त हो और वह सुन्दर त्वचा से आवृत हुआ रहे।
Essence
शरीर में सुरक्षित रेत:कण चक्षु आदि सब इन्द्रियों की शक्ति को ठीक बनाये रखते हैं और नीरोग शरीर को नीरोग त्वचा से आवृत किये रहते हैं।
Subject
शिवचक्षु