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Atharvaveda - Mantra 11

Atharvaveda 15/11/11

18 Sukta
11 Mantra
15/11/11
Devata- द्विपदा आर्ची अनुष्टुप् Rishi- अध्यात्म अथवा व्रात्य Chhanda- अथर्वा Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
ऐनं॑ निका॒मोग॑च्छति निका॒मे नि॑का॒मस्य॑ भवति॒ य ए॒वं वेद॑ ॥

आ । ए॒न॒म् । नि॒ऽका॒म: । ग॒च्छ॒ति॒ । नि॒ऽका॒मे । नि॒ऽका॒मस्य॑ । भ॒व॒ति॒ । य: । ए॒वम् । वेद॑ ॥११.११॥

Mantra without Swara
ऐनं निकामोगच्छति निकामे निकामस्य भवति य एवं वेद ॥

आ । एनम् । निऽकाम: । गच्छति । निऽकामे । निऽकामस्य । भवति । य: । एवम् । वेद ॥११.११॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (यत्) = जो (एनम्) = इसको (आह) = कहता है कि हे (व्रात्य) = वतिन्। (यथा ते वश:) = जैसी आपकी इच्छा हो, तथा (अस्तु इति) = वैसा ही हो। (तेन) = उस कथन से वह (वशमेव अवरुन्द्धे) = चाहने योग्य पदार्थों को अपने लिए सुरक्षित करता है। (यः एवं वेद) = जिस प्रकार व्रात्य का आतिथ्य करता हुआ (यथा ते वशः) = तथा अस्तु' यह कहना जानता है, (एवम्) = इस आतिथ्यकर्ता को (वशः आगच्छति) = सब इष्ट-पदार्थ प्राप्त होते हैं और यह (वशिनां वशी भवति) = सर्वश्रेष्ठ वशी बनता है। २. (यत्) = जो (एनम् आह) = इसको कहता है कि हे (व्रात्य) = वतिन्! (यथा ते निकाम:) = जैसी आपकी अभिलाषा हो तथा (अस्तु इति) = वैसा ही हो (तेन) = उस कथन से (निकामं एव अवरुन्द्धे) = सब अभिलषित पदार्थों को अपने लिए सुरक्षित करता है। (यः एवं वेद) = जो अतिथि के लिए ऐसा करना जानता है (एनं निकामः आगच्छति) = इसे अभिलषित पदार्थ (सर्वतः) = प्राप्त होते हैं। (निकामस्य निकामे भवति) = अभिलषित पदार्थों की प्राप्ति [पूर्ति] में यह स्थित होता है, अभिलषित पदार्थों को प्राप्त करता है।
Essence
आतिथ्य हमारे सब मनोरथों को पूर्ण करता है और हमें सब अभिलषित पदार्थ प्राप्त होते हैं।
Subject
वश:-निकामः