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Atharvaveda - Mantra 3

Atharvaveda 15/1/3

18 Sukta
8 Mantra
15/1/3
Devata- एकपदा यजुर्ब्राह्मी अनुष्टुप् Rishi- अध्यात्म अथवा व्रात्य Chhanda- अथर्वा Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
तदेक॑मभव॒त्तल्ल॒लाम॑मभव॒त्तन्म॒हद॑भव॒त्तज्ज्ये॒ष्ठम॑भव॒त्तद्ब्रह्मा॑भव॒त्तत्तपो॑ऽभव॒त्तत्स॒त्यम॑भव॒त्तेन॒ प्राजा॑यत ॥

तत् । एक॑म् । अ॒भ॒व॒त् । तत् । ल॒लाम॑म् । अ॒भ॒व॒त् । तत् । म॒हत् । अ॒भ॒व॒त् । तत् । ज्ये॒ष्ठम् । अ॒भ॒व॒त् । तत् । ब्रह्म॑ । अ॒भ॒व॒त् । तत् । तप॑: । अ॒भ॒व॒त् । तत् । स॒त्यम् । अ॒भ॒व॒त् । तेन॑ । प्र । अ॒जा॒य॒त॒ ॥१.३॥

Mantra without Swara
तदेकमभवत्तल्ललाममभवत्तन्महदभवत्तज्ज्येष्ठमभवत्तद्ब्रह्माभवत्तत्तपोऽभवत्तत्सत्यमभवत्तेन प्राजायत ॥

तत् । एकम् । अभवत् । तत् । ललामम् । अभवत् । तत् । महत् । अभवत् । तत् । ज्येष्ठम् । अभवत् । तत् । ब्रह्म । अभवत् । तत् । तप: । अभवत् । तत् । सत्यम् । अभवत् । तेन । प्र । अजायत ॥१.३॥

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Meaning
१. (तत्) = प्रभु ने जब इस व्रात्य की शक्तियों का विकास किया तब वह (एकं अभवत्) = अद्वितीय हुआ-वह अनुपमरूप से विकसित शक्तियोंवाला बना। (तत् ललामं अभवत्) = वह बड़े सुन्दर [charming] जीवनवाला हुआ। (तत् महत् अभवत्) = वह महान् हुआ। विकसित शक्तियोंवाले सुन्दर जीवनवाला होने से वह पूज्य हुआ। (तत् ज्येष्ठम् अभवत्) = वह प्रशस्यतम बना-सबसे बड़ा हुआ-'ज्ञान-बल व ऐश्वर्य' से बढ़ा। (तत् ब्रह्म अभवत्) = वह ज्ञान का पुञ्ज बना। (तत् तपः अभवत्) = वह तपोमूर्ति हुआ। (तत् सत्यं अभवत्) = वह सत्य का पालन करनेवाला हुआ। (तेन) = उस 'ब्रह्म, तप व सत्य' से वह (प्राजायत) = प्रकृष्ट विकासवाला हुआ। मस्तिष्क में ज्ञान से, शरीर में तप से तथा मन में सत्य से शोभायमान हुआ। २. इसप्रकार (स:) = वह अवर्धत-बढ़ा, (स:) = वह (महान्) = पूज्य (अभवत्) = हुआ। (सः महादेवः अभवत्) = उस महान् देव प्रभु के पूजन से वह पुजारी भी प्रभु के रंग में रंगा गया और वह महादेव ही हो गया। 'ब्रह्म इव' परमेश्वर सा बन गया। ३. (स:) = वह (देवानाम्) = सब देवों की (ईशा पर्यैत्) = ऐश्वर्यशक्ति को व्यास करनेवाला हुआ। सब दिव्यगुणों को धारण करने के लिए यत्नशील हुआ। इसी से (स:) = वह (ईशान:) = ईशान (अभवत्) = हो गया। उस व्रात्य का नाम ईशान ही पड़ गया।
Essence
व्रात्य ने प्रभु-सम्पर्क द्वारा अपने जीवन को अनुपम, सुन्दर, महान् व ज्येष्ठ बनाया। 'ज्ञान, तप व सत्य' को धारण करके वह विकसित शक्तिवाला हुआ। महादेव की उपासना करता हुआ 'महान् व ईशान' बना।
Subject
'ब्रह्म [ज्ञान] तप व सत्य' द्वारा व्रात्य का 'महादेव व ईशान' बनना