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Atharvaveda - Mantra 35

Atharvaveda 14/2/35

2 Sukta
75 Mantra
14/2/35
Devata- पुरोबृहती त्रिष्टुप् Rishi- आत्मा Chhanda- सवित्री, सूर्या Suktam- विवाह प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
नमो॑गन्ध॒र्वस्य॒ नम॑से॒ नमो॒ भामा॑य॒ चक्षु॑षे च कृण्मः। विश्वा॑वसो॒ ब्रह्म॑णाते॒ नमो॒ऽभि जा॒या अ॑प्स॒रसः॒ परे॑हि ॥

नम॑: । ग॒न्ध॒र्वस्य॑ । नम॑से। नम॑: । भामा॑य । चक्षु॑षे । च॒ । कृ॒ण्म॒: । विश्व॑वसो॒ इति॒ विश्व॑ऽवसो । ब्रह्म॑णा । ते॒ । नम॑: । अ॒भि । जा॒या: । अ॒प्स॒रस॑: । परा॑ । इ॒हि॒ ॥२.३५॥

Mantra without Swara
नमोगन्धर्वस्य नमसे नमो भामाय चक्षुषे च कृण्मः। विश्वावसो ब्रह्मणाते नमोऽभि जाया अप्सरसः परेहि ॥

नम: । गन्धर्वस्य । नमसे। नम: । भामाय । चक्षुषे । च । कृण्म: । विश्ववसो इति विश्वऽवसो । ब्रह्मणा । ते । नम: । अभि । जाया: । अप्सरस: । परा । इहि ॥२.३५॥

Meaning
१. (गन्धर्वस्य) = ज्ञान को धारण करनेवाले इस युवक को (नमसे नमः) = नम्रता के लिए अथवा शत्रुओं को झकानेवाले बल के लिए हम नमस्कार (कृण्म:) = करते हैं (च) = और इस युवक के (भामाय) = तेजस्विता से दीप्त (चक्षुषे) = नेत्रों के लिए (नमः) = नमस्कार करते हैं। हे (विश्वावसो) = घर में सबको बसानेवाले व सब आवश्यक धनोंवाले युवक! (ब्रह्मणा) = ज्ञान के कारण (ते नमः) = हम तेरे लिए नमस्कार करते हैं। तू (अप्सरस:) = गृहकार्यों में गतिशील (जाया: अभि) = पत्नी का लक्ष्य करके [परा towards]-(इहि) = उसकी ओर जानेवाला हो।
Essence
उत्तम गृहपति वही है जो 'नम्रता, उत्तम बल, दीस नेत्र व ज्ञान' से युक्त है। यह घर में सबको बसाने के लिए आवश्यक धनों का अर्जन करनेवाला हो। क्रियाशील पत्नी को प्रास होकर उत्तम सन्तान को प्रास करे।
Subject
नमसे, भामाय चक्षुषे

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