Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 54

Atharvaveda 14/1/54

2 Sukta
64 Mantra
14/1/54
Devata- भुरिक् त्रिष्टुप् Rishi- आत्मा Chhanda- सवित्री, सूर्या Suktam- विवाह प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
इ॑न्द्रा॒ग्नीद्यावा॑पृथि॒वी मा॑त॒रिश्वा॑ मि॒त्रावरु॑णा॒ भगो॑ अ॒श्विनो॒भा।बृह॒स्पति॑र्म॒रुतो॒ ब्रह्म॒ सोम॑ इ॒मां नारीं॑ प्र॒जया॑ वर्धयन्तु ॥

इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑ । द्यावा॑पृथि॒वी इति॑ । मा॒त॒रिश्वा॑ । मि॒त्रावरु॑णा । भग॑: । अ॒श्विना॑ । उ॒भा । बृह॒स्पति॑: । म॒रुत॑: । ब्रह्म॑ । सोम॑: । इ॒माम् । नारी॑म् । प्र॒ऽजया॑ । व॒र्ध॒य॒न्तु॒ ॥१.५४॥

Mantra without Swara
इन्द्राग्नीद्यावापृथिवी मातरिश्वा मित्रावरुणा भगो अश्विनोभा।बृहस्पतिर्मरुतो ब्रह्म सोम इमां नारीं प्रजया वर्धयन्तु ॥

इन्द्राग्नी इति । द्यावापृथिवी इति । मातरिश्वा । मित्रावरुणा । भग: । अश्विना । उभा । बृहस्पति: । मरुत: । ब्रह्म । सोम: । इमाम् । नारीम् । प्रऽजया । वर्धयन्तु ॥१.५४॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (इन्द्राग्नी) = इन्द्र और अग्नि, अर्थात् जितेन्द्रियता व आगे बढ़ने की भावना, (द्यावापृथिवी) = स्वस्थ मस्तिष्क व स्वस्थ शरीर [मूर्नो द्यौः, पृथिवी शरीरम्] (मातरिश्वा) = वायु, अर्थात् शुद्ध वायु का सेवन, (मित्रावरुणा) = स्नेह व निद्वेषता [द्वेष-निवारण] की भावना, (भग:) = उत्तम ऐश्वर्य-दरिद्रता का अभाव, (उभा अश्विना) = दोनों प्राण व अपान, (बृहस्पति:) = [बृहतां पतिः] विशाल हृदयता, संकुचित मनोवृत्ति का न होना, (मरुत:) = मितराविता-बहुत बोलने की प्रवृत्ति का न होना, (ब्रह्म) = ज्ञान (सोम:) = शरीर में सोमशक्ति का (रक्षण) = ये सब (इमां नारीम) = इस नारी को (प्रजया वर्धयन्तु) = उत्तम सन्तति से बढ़ाएँ। इन्द्र व अग्नि आदि शब्दों से सूचित भाव इस नारी को उत्तम सन्तति प्राप्त कराएँ।
Essence
सन्तति की उत्तमता के लिए गृहिणी को 'जितेन्द्रियता, प्रगतिशीलता, स्वस्थ मस्तिष्क, स्वस्थ शरीर, शुद्ध वायुसेवन, स्नेह, निढेषता, उत्तम ऐश्वर्य, प्राणशक्ति, अपानशक्ति, विशाल हृदयता, मितराविता, ज्ञान व सोमशक्ति का शरीर में रक्षण'-इन चौदह रत्नों को अपने जीवन में धारण करना चाहिए।
Subject
एक नारी के चौदह रत्न