Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 33

Atharvaveda 14/1/33

2 Sukta
64 Mantra
14/1/33
Devata- त्रिष्टुप् Rishi- आत्मा Chhanda- सवित्री, सूर्या Suktam- विवाह प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
इ॒मं गा॑वःप्र॒जया॒ सं वि॑शाथा॒यं दे॒वानां॒ न मि॑नाति भा॒गम्। अ॒स्मै वः॑ पू॒षाम॒रुत॑श्च॒ सर्वे॑ अ॒स्मै वो॑ धा॒ता स॑वि॒ता सु॑वाति ॥

इ॒मम् । गा॒व॒: । प्र॒ऽजया॑ । सम् । वि॒शा॒थ॒ । अ॒यम् । दे॒वाना॑म् । न । मि॒ना॒ति॒ । भा॒गम् । अ॒स्मै । व॒: । पू॒षा । म॒रुत॑: । च॒ । सर्वे॑ । अ॒स्मै । व॒: । धा॒ता । स॒वि॒ता। सु॒वा॒ति॒ ॥१.३३॥

Mantra without Swara
इमं गावःप्रजया सं विशाथायं देवानां न मिनाति भागम्। अस्मै वः पूषामरुतश्च सर्वे अस्मै वो धाता सविता सुवाति ॥

इमम् । गाव: । प्रऽजया । सम् । विशाथ । अयम् । देवानाम् । न । मिनाति । भागम् । अस्मै । व: । पूषा । मरुत: । च । सर्वे । अस्मै । व: । धाता । सविता। सुवाति ॥१.३३॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (गाव:) = गौओ! (इमम्) = इस नव-गृहस्थ को (प्रजया सं विशाथ) = उत्तम सन्तति के हेतु से प्रास होओ। (अयम्) = यह (देवानां भाग न मिनाति) = देवों के भाग को हिंसित नहीं करता, अर्थात् देवयज्ञ आदि में प्रमाद न करता हुआ, देवों के लिए उनका भाग देकर बचे हुए यजशेष का ही सेवन करता है। तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुले स्तेन एव सः'। इस गौ के द्वारा ही घृतादि प्राप्त कराकर देवयज्ञादि यज्ञ सम्पन्न कराये जाते हैं। (अस्मै) = इस गृहस्थ युवक के लिए (व:) = तुम्हें (पूषा) = पोषक प्रभु (च) = और (सर्वे मरुतः) = सब मरुत् प्राण प्रास कराते हैं, अर्थात् तुम्हारे दूध का प्रयोग करता हुआ ही यह अपने शरीर का उचित पोषण कर पाएगा तथा प्राणशक्ति के वर्धन में समर्थ होगा। (अस्मै) = इस गृहस्थ युवक के लिए (वः) = तुम्हें (धाता) = धारण करनेवाला (सविता) = शक्तियों को उत्पन्न करनेवाला प्रभु (सुवाति) = जन्म देता व प्रेरित करता है। प्रभु ने गौओं को वस्तुत: इसीलिए तो बनाया है कि ये इन गृहस्थों को उत्तम सात्त्विक दूध देकर उनका धारण करें और उनके शरीर में शक्तियों को उत्पन्न करें।
Essence
गोदुग्ध का सेवन उत्तम सन्तति को प्राप्त कराता है। यह शरीर का पोषण व धारण करता है, इससे प्राणशक्ति का वर्धन होता है। इसके द्वारा ही हम यज्ञादि को सुचारुरूप से कर पाते हैं।
Subject
'पोषक व धारक' गौ