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Atharvaveda - Mantra 30

Atharvaveda 14/1/30

2 Sukta
64 Mantra
14/1/30
Devata- सोम Rishi- आत्मा Chhanda- सवित्री, सूर्या Suktam- विवाह प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
स इत्तत्स्यो॒नंह॑रति ब्र॒ह्मा वासः॑ सुम॒ङ्गल॑म्। प्राय॑श्चित्तिं॒ यो अ॒ध्येति॒ येन॑ जा॒या नरिष्य॑ति ॥

स: । इत् । तत् । स्यो॒नम् । ह॒र॒ति॒ । ब्र॒ह्मा । वास॑: । सु॒ऽम॒ङ्गल॑म् । प्राय॑श्चित्त‍िम् । य: । अ॒धि॒ऽएति॑ । येन॑ । जा॒या । न । रिष्य॑ति ॥१.३०॥

Mantra without Swara
स इत्तत्स्योनंहरति ब्रह्मा वासः सुमङ्गलम्। प्रायश्चित्तिं यो अध्येति येन जाया नरिष्यति ॥

स: । इत् । तत् । स्योनम् । हरति । ब्रह्मा । वास: । सुऽमङ्गलम् । प्रायश्चित्त‍िम् । य: । अधिऽएति । येन । जाया । न । रिष्यति ॥१.३०॥

Meaning
१. (स: ब्रह्मा इत्) = वह अपने हृदय को विशाल बनानेवाला ज्ञानी पुरुष ही (तत्) = उस (स्योनम्) = सुखकर (सुमंगलम्) = उत्तम मंगल के साधनभूत (वास:) = वस्त्र को (हरति) = घर में प्राप्त कराता है, (येन) = जिस वस्त्र से जाया (न रिष्यति) = पत्नी हिंसित नहीं होती। पत्नी के लिए वस्त्र सुखकर भी हों, अच्छे भी लगें और स्वास्थ्य-रक्षा के लिए भी आवश्यक हों। २. वह ब्रह्मा इन वस्त्रों को प्राप्त करता है (यः) = जो (प्रायश्चित्तिं अध्येति) = 'प्रायोनाम तपः प्रोकं चितं निश्चय उच्यते। तपोनिश्चयसंयोगात् प्रायश्चित्तमितीर्यते ॥' तपस्यापूर्वक जीवन बिताने का निश्चय करता है, इस बात को भूलता नहीं [अध्येति-remembers] कि आराम का जीवन विनाश की ओर ले-जाता चतुर्थदर्श काण्डम् है। Ease, disease का कारण है। यह तपस्वी जीवन घरवालों के लिए अति उत्तम प्रभाव पैदा करता है।
Essence
विशाल हृदयवाला पति इस बात का ध्यान करता है कि पत्नी को आवश्यक वस्तुओं की कमी न हो। वह अपना जीवन तपस्यापूर्वक बिताता है, यह तपस्या ही उसे ब्रह्मा बनाती है।
Subject
गृह में उत्तम वस्त्रों का प्राप्त करना

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