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Atharvaveda - Mantra 49

Atharvaveda 13/4/49

4 Sukta
56 Mantra
13/4/49
Devata- अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- निचृत्साम्नी बृहती Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
अ॒न्नाद्ये॑न॒ यश॑सा॒ तेज॑सा ब्राह्मणवर्च॒सेन॑ ॥

अ॒न्न॒ऽअद्ये॑न । यश॑सा । तेज॑सा । ब्रा॒ह्म॒ण॒ऽव॒र्च॒सेन॑ ॥८.४॥

Mantra without Swara
अन्नाद्येन यशसा तेजसा ब्राह्मणवर्चसेन ॥

अन्नऽअद्येन । यशसा । तेजसा । ब्राह्मणऽवर्चसेन ॥८.४॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (पश्यत) = सर्वद्रष्टः प्रभो! (नमस्ते अस्तु) = आपके लिए नमस्कार हो। हे (पश्यत) = सबका ध्यान करनेवाले प्रभु (मा पश्य) = आप मुझे देखिए, मुझपर अपनी कृपादृष्टि सदा बनाये रखिए। आप मुझे (अन्नाद्येन) = अन्न के खाने के सामर्थ्य से, (यशसा) = यश से, (तेजसा) = तेज से तथा (ब्राह्मणवर्चसेन) = ब्रह्मवर्चस् से युक्त कीजिए।

 
Essence
हे प्रभो! आपकी कृपादृष्टि हमें प्राप्त हो। आप हमें 'अन्नाद्य, यश, तेज व ब्रह्मवर्चस्' प्राप्त कराइए।
Subject
प्रभु की कृपादृष्टि