Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 7

Atharvaveda 13/2/7

4 Sukta
46 Mantra
13/2/7
Devata- रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
सु॒खं सू॑र्य॒ रथ॑मंशु॒मन्तं॑ स्यो॒नं सु॒वह्नि॒मधि॑ तिष्ठ वा॒जिन॑म्। यं ते॒ वह॑न्ति ह॒रितो॒ वहि॑ष्ठाः श॒तमश्वा॒ यदि॑ वा स॒प्त ब॒ह्वीः ॥

सु॒ऽखम् । सूर्य॑ । रथ॑म् । अं॒शु॒ऽमन्त॑म् । स्यो॒नम् । सु॒ऽवह्नि॑म् । अधि॑ । ति॒ष्ठ॒ । वा॒जिन॑म् । यम् । ते॒ । वह॑न्ति । ह॒रित॑: । वहि॑ष्ठा: । श॒तम् । अश्वा॑: । यदि॑ । वा॒ । स॒प्त । ब॒ह्वी: ॥2.७॥

Mantra without Swara
सुखं सूर्य रथमंशुमन्तं स्योनं सुवह्निमधि तिष्ठ वाजिनम्। यं ते वहन्ति हरितो वहिष्ठाः शतमश्वा यदि वा सप्त बह्वीः ॥

सुऽखम् । सूर्य । रथम् । अंशुऽमन्तम् । स्योनम् । सुऽवह्निम् । अधि । तिष्ठ । वाजिनम् । यम् । ते । वहन्ति । हरित: । वहिष्ठा: । शतम् । अश्वा: । यदि । वा । सप्त । बह्वी: ॥2.७॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (सूर्य) = सूर्य! तू (रथम् अधितिष्ठ) = इस रथ पर अधिष्ठित हो, जो रथ (सुखम्) = हमारी सब इन्द्रियों की उत्तमता का कारण बनता है। (अंशुमन्तम्) = जो प्रकाश की किरणोंवाला है। (स्योनम्) = हमारे लिए सुख करनेवाला है। (सुवहिम्) = हमें स्वस्थ बनाता हुआ लक्ष्यस्थान की ओर ले-चलनेवाला है और (वाजिनम्) = हमें शक्तिशाली बनाता है। २. उस रथ पर तु अधिष्ठित हो (यं ते) = जिस तेरे रथ को (वहिष्ठाः हरित: वहन्ति) = वहनक्रिया में सर्वोत्तम किरणरूप अश्व वहन करते हैं (शतं अश्वा:) = सैकड़ों किरणाश्व इस तेरे रथ का वहन करनेवाले हैं। (यदि वा) = अथवा (सप्त बह्वी:) = सात रंगोंवाली-सात प्राणदायी तत्त्वों को प्राप्त करानेवाली, अतएव प्राणियों की वृद्धि की कारणभूत ये किरणें तेरे रथ का वहन करती हैं।
Essence
यह सूर्य का रथ अपने मार्ग पर किरणरूप अश्वों से आगे और आगे बढ़ता है। यह प्राणियों के लिए इन्द्रियों का स्वास्थ्य प्रदान करता है, अतएव उनके लिए सुखद व उन्हें लक्ष्यस्थान पर पहुँचानेवाला होता है। यह उन्हें शक्तिशाली बनाता है।
Subject
'सुख-स्योना, सुवह्नि' रथ