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Atharvaveda - Mantra 24

Atharvaveda 13/2/24

4 Sukta
46 Mantra
13/2/24
Devata- रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आर्षी गायत्री Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
अयु॑क्त स॒प्त शु॒न्ध्युवः॒ सूरो॒ रथ॑स्य न॒प्त्यः। ताभि॑र्याति॒ स्वयु॑क्तिभिः ॥

अयु॑क्त । स॒प्त । शु॒न्ध्युव॑: । सूर॑: । रथ॑स्य । न॒प्त्य᳡: । ताभि॑: । या॒ति॒ । स्वयु॑क्तिऽभि: ॥२.२४॥

Mantra without Swara
अयुक्त सप्त शुन्ध्युवः सूरो रथस्य नप्त्यः। ताभिर्याति स्वयुक्तिभिः ॥

अयुक्त । सप्त । शुन्ध्युव: । सूर: । रथस्य । नप्त्य: । ताभि: । याति । स्वयुक्तिऽभि: ॥२.२४॥

Meaning
१. (सूरः) = सूर्य (रथस्य नप्त्यः) = हमारे शरीररूप रथों को न गिरने देनेवाली (सप्त) = सात (शुन्थ्युव:) = शोधक किरणों को (अयुक्त) = रथ में जोतता है। सूर्य की किरणें सात रंगों के भेद से सात प्रकार की हैं। ये हमारे शरीरों में प्राणशक्ति का संचार करके हमारे शरीरों का शोधन करती हैं और उन शरीरों को गिरने नहीं देती। २. यह सूर्य (ताभि:) = उन (स्वयुक्तिभिः) = अपने रथ में जुती हुई किरणरूप अश्वों के साथ (याति) = अन्तरिक्ष में आगे-और-आगे चलता है।
Essence
सूर्य अपनी सात वर्णों की किरणों के साथ आगे-और-आगे बढ़ रहा है।
Subject
सूर्य-चङ्क्रमण

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