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Atharvaveda - Mantra 23

Atharvaveda 13/2/23

4 Sukta
46 Mantra
13/2/23
Devata- रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आर्षी गायत्री Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
स॒प्त त्वा॑ ह॒रितो॒ रथे॒ वह॑न्ति देव सूर्य। शो॒चिष्के॑शं विचक्ष॒णम् ॥

स॒प्त । त्वा॒ । ह॒रित॑: । रथे॑ । वह॑न्ति । दे॒व॒ । सू॒र्य॒ । शो॒चि:ऽके॑शम् । वि॒ऽच॒क्ष॒णम् ॥२.२३॥

Mantra without Swara
सप्त त्वा हरितो रथे वहन्ति देव सूर्य। शोचिष्केशं विचक्षणम् ॥

सप्त । त्वा । हरित: । रथे । वहन्ति । देव । सूर्य । शोचि:ऽकेशम् । विऽचक्षणम् ॥२.२३॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे (देव) = द्योतमान, हृदयों को निर्मल करके दीस करनेवाले! (सूर्य) = निरन्तर सरणशील सभी को कार्यों में प्रवृत्त करनेवाले सूर्य! (त्वा) = तुझे (सप्त हरित:) = सात रंगोंवाली रसहरणशील किरणें (रथे) = रथ में (वहन्ति) = धारण करती हैं, आगे ले-चलती हैं। २. तुझे ये आगे ले-चलती है जो तू (शोचिष्केशम्) = देदीप्यमान किरणरूप केशोंवाला है, (विचक्षणम्) = विशिष्ट प्रकाशवाला है अथवा सबके मस्तिष्कों को ज्ञानज्योति से प्रकाशित करनेवाला है।
Essence
सूर्य सताश्व है, सात रंगोंवाली सात किरणों से हमारे अन्दर सात प्राणदायी तत्त्वों को प्रविष्ट करके यह सूर्य हमारे रोगों का हरण करता है।

 
Subject
सप्ताश्व