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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 13/2/21

4 Sukta
46 Mantra
13/2/21
Devata- रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आर्षी गायत्री Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
येना॑ पावक॒ चक्ष॑सा भुर॒ण्यन्तं॒ जनाँ॒ अनु॑। त्वं व॑रुण॒ पश्य॑सि ॥

येन॑ । पा॒व॒क॒ । चक्ष॑सा । भु॒र॒ण्यन्त॑म् । जना॑न् । अनु॑ । त्वम् । व॒रु॒ण॒ । पश्य॑सि ॥२.२१॥

Mantra without Swara
येना पावक चक्षसा भुरण्यन्तं जनाँ अनु। त्वं वरुण पश्यसि ॥

येन । पावक । चक्षसा । भुरण्यन्तम् । जनान् । अनु । त्वम् । वरुण । पश्यसि ॥२.२१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. हे पावक-प्रकाश से जीवनों को पवित्र करनेवाले! हे वरुण सब रोगों व आसुर भावनाओं का निवारण करनेवाले सूर्य! त्वम्-त् जनान् भुरण्यन्तम्-लोगों का भरण व पोषण करनेवाले को-लोकों के धारणात्मक कर्मों में लगे हुए पुरुष को येन चक्षसा-जिस प्रकाश से अनुपश्यसि-अनुकूलता से देखता है, उसी प्रकाश को हम प्राप्त करें। वही प्रकाश हमसे स्तुति के योग्य हो। २. जो लोग द्वेष का निवारण करके [वरुण] अपने हृदय को पवित्र बनाकर [पावक] लोकहितकारी कार्यों में प्रवृत्त होते हैं [भुरण्यन्तम्] उनके लिए सूर्य का प्रकाश सदा हितकारी होता है। वस्तुत: हमारी वृत्ति उत्तम हो तो संसार भी हमारे लिए उत्तम होता है। हमारी दृष्टि में न्यूनता आने पर प्रकृति के देवता भी हमारे लिए उतने हितकर नहीं रहते।
Essence
सूर्य का प्रकाश उनके लिए हितकर होता है जो लोकों का भरण करनेवाले होते है।
Subject
भुरण्यन्-लोकभरण करनेवाला