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Atharvaveda - Mantra 18

Atharvaveda 13/2/18

4 Sukta
46 Mantra
13/2/18
Devata- रोहितः, आदित्यः, अध्यात्मम् Rishi- ब्रह्मा Chhanda- आर्षी गायत्री Suktam- अध्यात्म सूक्त
Mantra with Swara
अदृ॑श्रन्नस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ॒ अनु॑। भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा ॥

अदृ॑श्रन् । अ॒स्य॒ । के॒तव॑: । वि । र॒श्मय॑: । जना॑न् । अनु॑ । भ्राज॑न्त: । अ॒ग्नय॑: । य॒था॒॥२.१८॥

Mantra without Swara
अदृश्रन्नस्य केतवो वि रश्मयो जनाँ अनु। भ्राजन्तो अग्नयो यथा ॥

अदृश्रन् । अस्य । केतव: । वि । रश्मय: । जनान् । अनु । भ्राजन्त: । अग्नय: । यथा॥२.१८॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (अस्य) = इस उदित हुए-हुए सूर्य की (केतव:) = प्रज्ञापक प्रकाश देनेवाली (रश्मयः) = प्रकाश की किरणें (जनान् अनु) = मनुष्यों का लक्ष्य करके वि (अदृशन्) = इसप्रकार विशिष्ट रूप से दिखती हैं, (यथा) = जैसेकि (भाजन्तः अग्नयः) = चमकती हुई अग्नियाँ। २. सूर्य के उदित होने पर जैसे सूर्य की किरणें सारे ब्रह्माण्ड को प्रकाशित करनेवाली होती हैं, उसी प्रकार हमारे जीवन में ज्ञान के सूर्य का उदय होता है और जीवन प्रकाशमय हो जाता है। ये प्रकाश देदीप्यमान अग्नि के समान होता है। इसमें सब बुराइयों भस्म हो जाती हैं।
Essence
हमारे जीवन में ज्ञान का उदय हो और हमारी सब बराइयाँ अन्धकार के समान विलीन हो जाएँ।
Subject
केतवः रश्मयः