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Atharvaveda - Mantra 49

Atharvaveda 13/1/49

4 Sukta
60 Mantra
13/1/49
Devata- अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
ब्रह्म॑णा॒ग्नी वा॑वृधा॒नौ ब्रह्म॑वृद्धौ॒ ब्रह्मा॑हुतौ। ब्रह्मे॑द्धाव॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑ ॥

ब्रह्म॑णा । अ॒ग्नी इति॑ । व॒वृ॒धा॒नौ । ब्रह्म॑ऽवृध्दौ । ब्रह्म॑ऽआहुतौ । ब्रह्म॑ऽइध्दौ । अ॒ग्नी इति॑ । ई॒जा॒ते॒ इति॑ । रोहि॑तस्य । स्व॒:ऽविद॑: ॥१.४९॥

Mantra without Swara
ब्रह्मणाग्नी वावृधानौ ब्रह्मवृद्धौ ब्रह्माहुतौ। ब्रह्मेद्धावग्नी ईजाते रोहितस्य स्वर्विदः ॥

ब्रह्मणा । अग्नी इति । ववृधानौ । ब्रह्मऽवृध्दौ । ब्रह्मऽआहुतौ । ब्रह्मऽइध्दौ । अग्नी इति । ईजाते इति । रोहितस्य । स्व:ऽविद: ॥१.४९॥

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Meaning
१. (स्वर्विदः) = सुख व प्रकाश को प्राप्त करानेवाले (रोहितस्य) = तेजस्वी, सदावृद्ध प्रभु के (ब्रोम्होद्धौ) [ब्रह्म इद्धौ] = ज्ञान द्वारा दीस किये गये (अग्नी) = सूर्य व चन्द्ररूप अनि (ईजाते) = सृष्टियज्ञ को चलाते हैं। २. ये दोनों (अग्नी) = अग्नियाँ ब्रह्मणा वावृधानी-प्रभु से वेद द्वारा निरन्तर वृद्ध की जाती है। (ब्रह्मवृद्धौ) = ब्रह्म द्वारा ये वृद्ध हुई हैं। ब्रह्माहुतौ ब्रह्म द्वारा ये समन्तात् आहुत हुए हैं। प्रभु ने ही इन्हें बनाया है। प्रभु ही इनके प्रकाश को चारों ओर प्राप्त करा रहे है-प्रभु ही तो इनकी प्रभा हैं, 'प्रभास्मि शशिसूर्ययोः'।
Essence
सूर्य-चन्द्ररूप अग्रियों द्वारा यह सृष्टियज्ञ चल रहा है। ये दोनों अग्नियाँ प्रभु द्वारा वृद्ध की गई हैं-प्रभु ही इनके प्रकाश को चारों ओर प्राप्त करा रहे है।
Subject
'ब्रह्मवृद्धौ ब्रहोद्धौ' अग्नी