Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 43

Atharvaveda 13/1/43

4 Sukta
60 Mantra
13/1/43
Devata- अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- विराण्महाबृहती Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
आ॒रोह॒न्द्याम॒मृतः॒ प्राव॑ मे॒ वचः॑। उत्त्वा॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑पूता वहन्त्यध्व॒गतो॒ हर॑यस्त्वा वहन्ति ॥

आ॒ऽरोह॑न् । द्याम् । अ॒मृत॑: । प्र । अ॒व॒ । मे॒ । वच॑: । उत् । त्वा॒ । य॒ज्ञा: । ब्रह्म॑ऽपूता: । व॒ह॒न्ति॒ । अ॒ध्व॒ऽगत॑: । हर॑य: । त्वा॒ । व॒ह॒न्ति॒ ॥१.४३॥

Mantra without Swara
आरोहन्द्याममृतः प्राव मे वचः। उत्त्वा यज्ञा ब्रह्मपूता वहन्त्यध्वगतो हरयस्त्वा वहन्ति ॥

आऽरोहन् । द्याम् । अमृत: । प्र । अव । मे । वच: । उत् । त्वा । यज्ञा: । ब्रह्मऽपूता: । वहन्ति । अध्वऽगत: । हरय: । त्वा । वहन्ति ॥१.४३॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. प्रभु जीव से कहते हैं कि (द्याम् आरोहन) = मस्तिष्करूप द्युलोक में आरोहन करता हुआ (अ-मृतः) = नीरोग बनता हुआ तू मे (वचः प्राव) = मुझसे दी गई वेदवाणी का प्रकर्षेण रक्षण कर। यह वेदवाणी ही वस्तुत: प्रकाशमय व नीरोग जीवनवाला बनाएगी। २. (त्वा) = तुझे (ब्रह्मपूता:) = वेदवाणी के उच्चारण से पवित्र किये गये (यज्ञाः) = यज्ञ (उद् वहन्ति) = उत्कृष्ट स्थिति में प्राप्त कराते हैं। (अध्यगतः हरय:) = मार्ग पर चलनेवाले ये इन्द्रियाश्व (त्वा वहन्ति) = तुझे लक्ष्यस्थान पर पहुँचानेवाले होते हैं।
Essence
वेदवाणी का नियम से स्वाध्याय करते हुए हम प्रकाश व नीरोगता को प्राप्त करें-दीप्त मस्तिष्कवाले व नीरोग शरीरवाले बनें । मन्त्रों द्वारा हम यज्ञों को करनेवाले हों तथा हमारे इन्द्रियाश्व सदा मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हमें लक्ष्यस्थान पर पहुँचाएँ।
Subject
प्रकाशमय नीरोम जीवन