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Atharvaveda - Mantra 4

Atharvaveda 13/1/4

4 Sukta
60 Mantra
13/1/4
Devata- अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- जगती Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
रुहो॑ रुरोह॒ रोहि॑त॒ आ रु॑रोह॒ गर्भो॒ जनी॑नां ज॒नुषा॑मु॒पस्थ॑म्। ताभिः॒ संर॑ब्ध॒मन्व॑विन्द॒न्षडु॒र्वीर्गा॒तुं प्र॒पश्य॑न्नि॒ह रा॒ष्ट्रमाहाः॑ ॥

रुह॑: । रु॒रो॒ह॒ । रोहि॑त: । आ । रु॒रो॒ह॒ । गर्भ॑: । जनी॑नाम् । ज॒नुषा॑म् । उ॒पऽस्थ॑म् । ताभि॑: । सम्ऽर॑ब्धम् । अनु॑ । अ॒वि॒न्द॒न् । षट् । उ॒र्वी: । गा॒तुम् । प्र॒ऽपश्य॑न् । इ॒ह । रा॒ष्ट्रम् । आ । अ॒हा॒: ॥१.४॥

Mantra without Swara
रुहो रुरोह रोहित आ रुरोह गर्भो जनीनां जनुषामुपस्थम्। ताभिः संरब्धमन्वविन्दन्षडुर्वीर्गातुं प्रपश्यन्निह राष्ट्रमाहाः ॥

रुह: । रुरोह । रोहित: । आ । रुरोह । गर्भ: । जनीनाम् । जनुषाम् । उपऽस्थम् । ताभि: । सम्ऽरब्धम् । अनु । अविन्दन् । षट् । उर्वी: । गातुम् । प्रऽपश्यन् । इह । राष्ट्रम् । आ । अहा: ॥१.४॥

Meaning
१. (रोहित:) = वह सदा से प्रवृद्ध प्रभु (रूहः रुकोह) [रुह् प्रादुर्भावे] = सब सृष्टि की उत्पत्ति की सामग्रियों को जन्म देते हैं। प्रकृति से 'महतत्व, अहंकार, पञ्चतन्मात्राएँ, इन्द्रियों व पञ्चस्थूलभूतों' को जन्म देते हैं। (जनीनां गर्भ:) = सब उत्पादक सामग्रियों को गर्भ में धारण करनेवाला वह प्रभु (जनुषा उपस्थं आरुरोह) = सब उत्पन्न होनेवाले पदार्थों को गोद में आरोहन किये हुए हैं-सब उत्पन्न पदार्थों के अन्दर व्याप्त है। २. (ताभिः संरब्धम्) = उन सब उत्पादक शक्तियों से युक्त [closely joined] उस प्रभु को (षट् उर्वी:) = ये छह विशाल दिशाएँ (अनुअविन्दन) = व्यास किये हुए है-इन सब विस्तृत दिशाओं में वे व्याप्त है। (गातं प्रपश्यन) = मार्ग को प्रकर्षेण दिखलाता हुआ वह प्रभु [प्रपश्यन्-प्रदर्शयन्] (इह) = यहाँ (राष्ट्रम्) = इस ब्रह्माण्डरूप राष्ट्र को (आहा:) = प्राप्त कराता है [आहरत्] इस ब्रह्माण्डरूप राष्ट्र को इस रूप में लानेवाले वे प्रभु ही हैं।
Essence
वे प्रभु सृष्टिनिर्माण की सब सामग्रियों को जन्म देते हैं। इन सामग्नियों को अपने अन्दर धारण करते हुए वे सब पदार्थों में विद्यमान हैं। सब उत्पादक शक्तियों से युक्त प्रभु सब दिशाओं में व्याप्त हैं। वे पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ऊपर-नीचे सर्वत्र विद्यमान हैं। हम सब के लिए मार्ग दिखलाते हुए वे प्रभु ब्रह्माण्डरूप राष्ट्र को उत्पन्न करते हैं।
Subject
ब्रह्माण्डरूप राष्ट्र का निर्माण

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