Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 38

Atharvaveda 13/1/38

4 Sukta
60 Mantra
13/1/38
Devata- अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- त्रिष्टुप् Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
य॒शा या॑सि प्र॒दिशो॒ दिश॑श्च य॒शाः प॑शू॒नामु॒त च॑र्षणी॒नाम्। य॒शाः पृ॑थि॒व्या अदि॑त्या उ॒पस्थे॒ऽहं भू॑यासं सवि॒तेव॒ चारुः॑ ॥

य॒शा: । या॒सि॒ । प्र॒ऽदिश॑: । दिश॑: ।च॒ । य॒शा: । प॒शू॒नाम् । उ॒त । च॒र्ष॒णी॒नाम् । य॒शा: । पृ॒थि॒व्या: । अदि॑त्या: । उ॒पऽस्थे॑ । भू॒या॒स॒म् । स॒वि॒ताऽइ॑व । चारु॑: ॥१.३८॥

Mantra without Swara
यशा यासि प्रदिशो दिशश्च यशाः पशूनामुत चर्षणीनाम्। यशाः पृथिव्या अदित्या उपस्थेऽहं भूयासं सवितेव चारुः ॥

यशा: । यासि । प्रऽदिश: । दिश: ।च । यशा: । पशूनाम् । उत । चर्षणीनाम् । यशा: । पृथिव्या: । अदित्या: । उपऽस्थे । भूयासम् । सविताऽइव । चारु: ॥१.३८॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे प्रभो! (यशा:) = [यशः अस्ति अनेन] उपासक के जीवन को यशस्वी बनानेवाले आप (दिशः प्रदिशः च यासि) = सब दिशाओं व प्रदिशाओं में व्याप्त हैं। आप ही (पशूनाम् यशा:) = उस उस पशु में उस-उस यश को स्थापित करनेवाले हैं। मक्खियों को फूलों से रस लेकर शहद के निर्माण की शक्ति आप ही प्राप्त कराते हैं। चील को निष्कम्प पक्षों से आकाश में गति की शक्ति आप ही देते हैं। सिंह को नदी को कुशलता से तैरने की शक्ति आप ही देते हैं (उत) = और (चर्षणीनाम्) = मनुष्यों के यश भी आप ही है। बुद्धिमानों की बुद्धि आप हैं तो तेजस्वियों के तेज आप ही हैं। बलवानों का कामरागविवर्जित बल भी आप ही हैं। २.हे प्रभो! आपकी कृपा से (पृथिव्याः) = इस पृथिवी माता की तथा (अदित्या:) = अखण्डित वेदवाणी की (उपस्थे) = गोद में (अहम्) = मैं (यशा:) = यशस्वी जीवनवाला (भूयासम्) = होऊँ। मैं (सविता इव चारु:) = सूर्य की भौति दीस, सुन्दर जीवनवाला बनूं। पृथिवीमाता की गोद में रहता हुआ, स्वाभाविक जीवन बिताता हुआ मैं स्वस्थ बनूं तथा वेदवाणी की गोद में मैं ज्ञानदीस बनूँ। इसप्रकार सूर्य के समान चमकनेवाला होऊँ।
Essence
दिशाओं में, पशुओं व मनुष्यों में, सर्वत्र प्रभु के ही यश का विस्तार है। हम पृथिवीमाता की गोद में वेदवाणी को अपनाते हुए स्वस्थ, ज्ञानदीप्त बनकर यशस्वी जीवनवाले हो।
Subject
यशाः