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Atharvaveda - Mantra 15

Atharvaveda 13/1/15

4 Sukta
60 Mantra
13/1/15
Devata- अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः Rishi- ब्रह्मा Chhanda- अतिजागतगर्भा जगती Suktam- अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Mantra with Swara
आ त्वा॑ रुरोह बृह॒त्यु॒त प॒ङ्क्तिरा क॒कुब्वर्च॑सा जातवेदः। आ त्वा॑ रुरोहोष्णिहाक्ष॒रो व॑षट्का॒र आ त्वा॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रेत॑सा स॒ह ॥

आ । त्वा॒ । रु॒रो॒ह॒ । बृ॒ह॒ती । उ॒त । प॒ङ्क्ति: । आ । क॒कुप् । वर्च॑सा । जा॒त॒ऽवे॒द॒: । आ । त्वा॒ । रु॒रो॒ह॒ । उ॒ष्णि॒हा॒ऽअ॒क्ष॒र: । व॒ष॒ट्ऽका॒र: । आ । त्वा॒ । रु॒रो॒ह॒ । रोहि॑त: । रेत॑सा । स॒ह ॥१.१५।

Mantra without Swara
आ त्वा रुरोह बृहत्युत पङ्क्तिरा ककुब्वर्चसा जातवेदः। आ त्वा रुरोहोष्णिहाक्षरो वषट्कार आ त्वा रुरोह रोहितो रेतसा सह ॥

आ । त्वा । रुरोह । बृहती । उत । पङ्क्ति: । आ । ककुप् । वर्चसा । जातऽवेद: । आ । त्वा । रुरोह । उष्णिहाऽअक्षर: । वषट्ऽकार: । आ । त्वा । रुरोह । रोहित: । रेतसा । सह ॥१.१५।

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1 Bhashyas
Meaning
१. गतमन्त्र के अनुसार जीवन से यज्ञ का प्रतिपादन करनेवाले–यज्ञमय जीवनवाले (त्वा) = तुझे (बृहती आरुरोह) = बृहती आरोहण करती है। 'वाग्वै बहती' [श०१४.४.१.२२] यह वाग्रूप बृहती तुझे प्राप्त होती है। वेदवाणी द्वारा प्राप्त ज्ञान तुझे अलंकृत करता है (उत) = और पङ्गिः ['पङ्किर्विष्णो: पत्नी' गो० उ०२.९] विष्णु की पत्नी'लक्ष्मी'तुझे मातरूपेण प्रास होती है। इसके द्वारा तेरे सारे भौतिक कार्य शोभा के साथ चलते हैं। है (जातवेदः) = उत्पन्न ज्ञानवाले [विद् ज्ञाने] तथा उत्पन्न धनवाले [विद् लाभे] उपासक! तुझे (वर्चसा) = वर्चस के साथ (ककुप् आ) [रोह] = प्राणो वै ककुप् छन्दः श०८.५.२.४ प्राणशक्ति आरूढ़ होती है। तू प्राणशक्ति-सम्पन्न बनकर नीरोग व सुन्दर जीवनवाला होता है। २. (त्वा) = तुझे (उष्णिहा अक्षर:) = [आयुर्वा उष्णिक् ऐ०१.५] जिसमें शक्ति का क्षरण [विनाश] नहीं हुआ ऐसा (आयुष्य आरुरोह) = प्राप्त होता है। (वषट्कार:)[आरुरोह] = [ओजश्च सहश्च वषट्कारश्च प्रियतमे तन्वी' ऐ०३.८] तुझे ओजस्विता व सहनशक्ति प्राप्त होती है। अब इस स्थिति में वह (रोहित:) = तेजस्वी प्रभु (रेतसा सह) = रेतस के साथ [शक्ति के साथ] (स्वा) = तुझे (आरुरोह) = आरोहण करता है-प्राप्त होता है।

 
Essence
यज्ञशील को 'ज्ञान, श्री, प्राणशक्ति, वर्चस, शक्ति-सम्पन्न दीर्घजीवन, ओजस्विता व सहनशीलता' प्राप्त होती है और अब 'शक्ति के साथ प्रभु' इसे प्राप्त होते हैं।
Subject
बृहती, पति, ककुप