Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 40

Atharvaveda 12/5/40

5 Sukta
73 Mantra
12/5/40
Devata- ब्रह्मगवी Rishi- अथर्वाचार्यः Chhanda- याजुष्यनुष्टुप् Suktam- ब्रह्मगवी सूक्त
Mantra with Swara
अ॑स्व॒गता॒ परि॑ह्णुता ॥

अ॒स्व॒गता॑ । परि॑ऽह्नुता ॥९.२॥

Mantra without Swara
अस्वगता परिह्णुता ॥

अस्वगता । परिऽह्नुता ॥९.२॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (तस्याः) = उस ब्रह्मगवी का (आहननम्) = मारना (कृत्या) = अपनी हिंसा करना है, (आशसनम्) = उसका टुकड़े करना (मेनि:) = वज्राघात के समान है, (ऊबध्यम्) = [दुर् बन्धनम्] उसको बुरी तरह से बाँधना (वलग:) = [वल+ग] हलचल की ओर ले-जानेवाला है-प्रजा में विप्लव को पैदा करनेवाला है। २. (परिह्रुता) = [हु अपनयने] अपनीता व चुरा ली गई यह ब्रह्मगवी (अस्व-गता) = निर्धनता की ओर गम वाली होती है-यह निर्धनता को उत्पन्न कर देती है। उस समय यह ब्रह्मगवी (क्रव्यात् अग्निः भूत्वा) = कच्चा मांस खा-जानेवाली अग्नि बनकर (ब्रह्मज्यं प्रविश्य अत्ति) = ब्रह्म की हानि करनेवाले में प्रवेश करके उसे खा जाती है। (अस्य) = इसके (सर्वा अङ्गा) = सब अङ्गों को (पर्वा) = पर्वों को-जोड़ों को व (मूलानि) = मूलों को (वृश्चति) = छिन्न कर देती है।
Essence
विनष्ट की गई ब्रह्मगवी विनाश का ही कारण बनती है।
Subject
सर्वविनाश