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Atharvaveda - Mantra 8

Atharvaveda 12/4/8

5 Sukta
53 Mantra
12/4/8
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशा गौ सूक्त
Mantra with Swara
यद॑स्या॒ गोप॑तौ स॒त्या लोम॒ ध्वाङ्क्षो॒ अजी॑हिडत्। ततः॑ कुमा॒रा म्रि॑यन्ते॒ यक्ष्मो॑ विन्दत्यनाम॒नात् ॥

यत् । अ॒स्या॒: । गोऽप॑तौ । स॒त्या: । लोम॑ । ध्वाङ्क्ष॑: । अजी॑हिडत् । तत॑: । कु॒मा॒रा: । म्रि॒य॒न्ते॒ । यक्ष्म॑: । वि॒न्द॒ति॒ । अ॒ना॒म॒नात् ॥४.८॥

Mantra without Swara
यदस्या गोपतौ सत्या लोम ध्वाङ्क्षो अजीहिडत्। ततः कुमारा म्रियन्ते यक्ष्मो विन्दत्यनामनात् ॥

यत् । अस्या: । गोऽपतौ । सत्या: । लोम । ध्वाङ्क्ष: । अजीहिडत् । तत: । कुमारा: । म्रियन्ते । यक्ष्म: । विन्दति । अनामनात् ॥४.८॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. (गोपतौ) = ज्ञान की बाणियों के रक्षक विद्वान् पुरुष में (सत्याः अस्याः) = विद्यमान इस वेदवाणी के (लोम) = [लूल छेदने] वासना विच्छेदनरूप कर्म को (यत्) = जब (ध्वाक्ष:) = [ध्वाक्षि घोरवाशिते] व्यर्थ के कर्कश शब्द बोलनेवाला-कां कां बोलनेवाला व्यक्ति (अजीहिडत्) = घृणा से देखता है, अर्थात् वेदवाणी वासना का विच्छेद करती है' इस बात का उपहास करता है, (तत:) = तब (कुमारा:) = उस घर में आनेवाली सन्ताने (म्रियन्ते) = छोटी उम्न में ही मर जाती हैं। २. (अनामनात) = इस वेदवाणी का अभ्यास व मनन न करने से (यक्ष्मः विन्दति) = घरवालों को रोग प्रास होता है। जब घर में वेदवाणी का स्थान भोग-विलास ले-लेता है, तब उस घर में रोगों का आना स्वाभाविक ही है।
Essence
'वेदवाणी के रक्षक विद्वान् के जीवन में यह वेदवाणी वासनाओं का विच्छेद करती है. जब इस बात का उपहास करके वेद का त्याग होता है तब असमय की मृत्यु व रोगों का आक्रमण होता है।
Subject
वेदत्याग से रोग व मृत्यु