Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 46

Atharvaveda 12/4/46

5 Sukta
53 Mantra
12/4/46
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशा गौ सूक्त
Mantra with Swara
वि॑लि॒प्ती या बृ॑हस्प॒तेऽथो॑ सू॒तव॑शा व॒शा। तस्या॒ नाश्नी॑या॒दब्रा॑ह्मणो॒ य आ॒शंसे॑त॒ भूत्या॑म् ॥

वि॒ऽलि॒प्ती । या । बृ॒ह॒स्प॒ते॒ । अथो॒ इति॑ । सू॒तऽव॑शा । व॒शा । तस्या॑: । न । अ॒श्नी॒या॒त्। अब्रा॑ह्मण: । य: । आ॒ऽशंसे॑त । भूत्या॑म् ॥४.४६॥

Mantra without Swara
विलिप्ती या बृहस्पतेऽथो सूतवशा वशा। तस्या नाश्नीयादब्राह्मणो य आशंसेत भूत्याम् ॥

विऽलिप्ती । या । बृहस्पते । अथो इति । सूतऽवशा । वशा । तस्या: । न । अश्नीयात्। अब्राह्मण: । य: । आऽशंसेत । भूत्याम् ॥४.४६॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. हे (बृहस्पते) = ज्ञानिन्! (वशा) = जो वेदवाणी (विलिप्ती) = हमारी शक्तियों का विशेषरूप से उपचय करनेवाली है और जो (सूतवशा) = अपने जीवन का नियन्त्रण करनेवाले के वश में होती है, (तस्याः) = उस वेदवाणी का वह (अब्राह्मण:) = अब्रह्मचारी (न अश्नीयात्) = नहीं उपभोग कर पाता, (यः) = जोकि (भूत्यां आशंसेत) = ऐश्वर्य में इच्छावाला होता है। धन की ओर झुकाव हो जाने पर मनुष्य वेदवाणी को नहीं प्राप्त करता। यह वेदवाणी हमारी शक्तियों का उपचय करती है और उसी को प्रास होती है जोकि अपना नियन्त्रण करनेवाला बनता है।
Essence
धनासक्त अब्राह्मण इस वेदवाणी को नहीं प्राप्त करता। यह शक्तियों का उपचय करनेवाली वेदवाणी नियनता को ही प्राप्त होती है।
Subject
सूतवशा वशा