Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 37

Atharvaveda 12/4/37

5 Sukta
53 Mantra
12/4/37
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशा गौ सूक्त
Mantra with Swara
प्र॑वी॒यमा॑ना चरति क्रु॒द्धा गोप॑तये व॒शा। वे॒हतं॑ मा॒ मन्य॑मानो मृ॒त्योः पाशे॑षु बध्यताम् ॥

प्र॒ऽवी॒यमा॑ना । च॒र॒ति॒ । क्रु॒ध्दा । गोऽप॑तये । व॒शा । वे॒हत॑म्। मा॒ । मन्य॑मान: । मृ॒त्यो: । पाशे॑षु । ब॒ध्य॒ता॒म् ॥४.३७॥

Mantra without Swara
प्रवीयमाना चरति क्रुद्धा गोपतये वशा। वेहतं मा मन्यमानो मृत्योः पाशेषु बध्यताम् ॥

प्रऽवीयमाना । चरति । क्रुध्दा । गोऽपतये । वशा । वेहतम्। मा । मन्यमान: । मृत्यो: । पाशेषु । बध्यताम् ॥४.३७॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. यह वशा कमनीया वेदवाणी (प्रवीयमाना) = [वी असने] परे फेंकी जाती हुई (गो-पतये) = [गौ-भूमि] भूमिपति राजा के लिए (क्रुद्धा चरति) = क्रुद्ध हुई-हुई गति करती है। यदि राजा राष्ट्र में इस वेदवाणी का प्रचार नहीं करता तो वह इस वशा के कोप का भाजन होता है। २. (मा) = मुझे-वशा को (वेहतम्) = एक बन्ध्या गौ [a barren cow] (मन्यमानः) = मानता हुआ-मुझे निष्फल समझता हुआ यह राजा (मृत्योः पाशेषु) = मृत्यु के पाशों में (बध्यताम्) = बाँधा जाए।
Essence
वेदवाणी का निरादर राष्ट्र की अवनति का, मृत्यु [परतन्त्रता] का कारण बनता है।
Subject
वेदवाणी के निरादर का परिणाम