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Atharvaveda - Mantra 23

Atharvaveda 12/4/23

5 Sukta
53 Mantra
12/4/23
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशा गौ सूक्त
Mantra with Swara
य ए॒वं वि॒दुषे॑ऽद॒त्त्वाथा॒न्येभ्यो॒ दद॑द्व॒शाम्। दु॒र्गा तस्मा॑ अधि॒ष्ठाने॑ पृथि॒वी स॒हदे॑वता ॥

य: । ए॒वम् । वि॒दुषे॑ । अद॑त्त्वा । अथ॑ । अ॒न्येभ्य॑: । दद॑त् । व॒शाम् । दु॒:ऽगा । तस्मै॑ । अ॒धि॒ऽस्थाने॑ । पृ॒थि॒वी । स॒हऽदे॑वता ॥४.२३॥

Mantra without Swara
य एवं विदुषेऽदत्त्वाथान्येभ्यो ददद्वशाम्। दुर्गा तस्मा अधिष्ठाने पृथिवी सहदेवता ॥

य: । एवम् । विदुषे । अदत्त्वा । अथ । अन्येभ्य: । ददत् । वशाम् । दु:ऽगा । तस्मै । अधिऽस्थाने । पृथिवी । सहऽदेवता ॥४.२३॥

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Meaning
१. (अथ) = अब (यः) = जो (एवम्) = इसप्रकार [मधुरता से] (विदुषे) = एक विद्वान् के लिए समझदार के लिए (वशाम्) = कमनीय वेदवाणी को (अदत्त्वा) = न देकर (अन्येभ्यः) = अन्य पुरुषों के लिए, धन आदि के प्रलोभन से प्रेरित होकर, (ददत्) = देता हुआ होता है, (तस्मै) = उसके लिए यहाँ (अधिष्ठाने) = घर में यह (पृथिवी) = पृथिवी (सहदेवता) = सब अग्नि, जल, वायु आदि देवों के साथ दुर्गा-दुःख देनेवाली [दुः गमयति] होती है।
Essence
वेदवाणी का यदि धन के बदले विक्रय किया जाता है और एक विद्वान् के लिए इसे प्रास नहीं कराया जाता तो यह पृथिवी, अन्य सब देवों के साथ, उसके लिए कष्टप्रद हो जाती है, अर्थात् वह वेदवाणी का विक्रेता आधिदैविक आपत्तियों का शिकार होता है।

 
Subject
तस्मै पृथिवी दुर्गा