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Atharvaveda - Mantra 21

Atharvaveda 12/4/21

5 Sukta
53 Mantra
12/4/21
Devata- वशा Rishi- कश्यपः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- वशा गौ सूक्त
Mantra with Swara
हेडं॑ पशू॒नां न्येति ब्राह्म॒णेभ्योऽद॑दद्व॒शाम्। दे॒वानां॒ निहि॑तं भा॒गं मर्त्य॒श्चेन्नि॑प्रिया॒यते॑ ॥

हेड॑म् । प॒शू॒नाम् । नि । ए॒ति॒ । ब्रा॒ह्म॒णेभ्य॑: । अद॑दत् । व॒शाम् । दे॒वाना॑म् । निऽहि॑तम् । भा॒गम् । मर्त्य॑: । च॒ । इत् । नि॒ऽप्रि॒य॒यते॑ ॥४.२१॥

Mantra without Swara
हेडं पशूनां न्येति ब्राह्मणेभ्योऽददद्वशाम्। देवानां निहितं भागं मर्त्यश्चेन्निप्रियायते ॥

हेडम् । पशूनाम् । नि । एति । ब्राह्मणेभ्य: । अददत् । वशाम् । देवानाम् । निऽहितम् । भागम् । मर्त्य: । च । इत् । निऽप्रिययते ॥४.२१॥

Meaning
१. (ब्राह्मणेभ्यः) = ब्रह्मज्ञान के इच्छुकों के लिए (वशाम्) = इस कमनीय वेदवाणी को (अददत्) = न देता हुआ (पशूनां हेडं नि एति) = सब प्राणियों की घृणा को निश्चय से प्राप्त करता है अथवा पशुओं का भी यह प्रिय नहीं होता-इसके गौ आदि पशु सम्पन्न-क्षीरतम नहीं होते। २. यह सब तब होता है (चेत्) = जबकि (देवानाम्) = 'अग्नि, वायु, आदित्य व अङ्गिरा' आदि देवों के (निहितं भागम्) = हदयों में प्रभु द्वारा स्थापित इस भजनीय वेदज्ञान को (मर्त्यः) = कोई मनुष्य (निप्रियायते) = नीच भाव से अपना ही प्रिय धन मानकर छिपा रखता है।
Essence
हमें वेदज्ञान को प्राप्त करके अवश्य उसका प्रचार करना चाहिए। वेदज्ञान को चाहनेवालों के लिए उसे देना चाहिए। अन्यथा हम पशुओं के भी प्रिय न रहेंगे, वे हमें उत्तम दुध आदि को प्राप्त करानेवाले न होंगे।
Subject
पशूनां हेडम्

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