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Atharvaveda - Mantra 1

Atharvaveda 12/3/1

5 Sukta
60 Mantra
12/3/1
Devata- स्वर्गः, ओदनः, अग्निः Rishi- यमः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Suktam- स्वर्गौदन सूक्त
Mantra with Swara
पुमा॑न्पुं॒सोऽधि॑ तिष्ठ॒ चर्मे॑हि॒ तत्र॑ ह्वयस्व यत॒मा प्रि॒या ते॑। याव॑न्ता॒वग्रे॑ प्रथ॒मं स॑मे॒यथु॒स्तद्वां॒ वयो॑ यम॒राज्ये॑ समा॒नम् ॥

पुमा॑न् । पुं॒स: । अधि॑ । ति॒ष्ठ॒ । चर्म॑ । इ॒हि॒। तत्र॑ । ह्व॒य॒स्व॒ । य॒त॒मा । प्रि॒या । ते॒ । याव॑न्तौ । अग्रे॑ । प्र॒थ॒मम् । स॒म्ऽएयथु॑: । तत् । वा॒म् । वय॑: । य॒म॒ऽराज्ये॑ । स॒मा॒नम् ॥३.१॥

Mantra without Swara
पुमान्पुंसोऽधि तिष्ठ चर्मेहि तत्र ह्वयस्व यतमा प्रिया ते। यावन्तावग्रे प्रथमं समेयथुस्तद्वां वयो यमराज्ये समानम् ॥

पुमान् । पुंस: । अधि । तिष्ठ । चर्म । इहि। तत्र । ह्वयस्व । यतमा । प्रिया । ते । यावन्तौ । अग्रे । प्रथमम् । सम्ऽएयथु: । तत् । वाम् । वय: । यमऽराज्ये । समानम् ॥३.१॥

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1 Bhashyas
Meaning
१. घर को स्वर्ग बनाने के लिए सर्वप्रथम आवश्यक बात यह है कि मनुष्य शक्तिशाली हो। निर्बलता कभी स्वर्ग को जन्म नहीं दे सकती, अत: कहते हैं कि (पुमान्) = तू शक्तिशाली बन-पुरुष बन। (पुंसः अधितिष्ठ) = शक्तिशालियों का अधिष्ठाता बन । शक्तिशालियों में तेरा स्थान उच्च हो। (चर्म इहि) = [फलकोऽस्त्री फलं चर्म] तू ढाल को प्राप्त हो। शरीर में 'वीर्य' ही वह ढाल है, जोकि सब रोगरूप शत्रुओं के आक्रमण से हमें बचाती है। (तत्र) = वहाँ गृहस्थाश्रम में (ह्वयस्व) = तू उस जीवन के साथी को पुकार (यतमा प्रिया ते) = जोकि तुझे प्रिय हो। वस्तुत: घर का स्वर्ग बनना इस बात पर निर्भर करता है कि जीवन का साथी अनुकूल मिलता है या नहीं। साथी की अनुकूलता में घर अवश्य स्वर्ग बनता है। २. (अग्रे) = पहले ब्रह्मचर्याश्रम में आप (यावन्तौ) = जितने (प्रथमं समेयथः) = प्रथम स्थान में गतिवाले होते हो, अर्थात् उन्नति करते हो, (तत्) = वह (वाम्) = आप दोनों का (वयः) = जीवन (यमराज्ये) = संयत जीवनवाले पुरुष के राज्यभूत इस गृहस्थ में (समानम्) = समान बना रहे अर्थात् जैसे ब्रह्मचर्याश्रम में आपका जीवन संयम से उन्नत हुआ, उसी प्रकार इस गृहस्थ को भी आप दोनों ने (यमराज्ये) = संयमीपुरुष का राज्य बनाना। इस यमराज्य में आप दोनों का जीवन उसी प्रकार उन्नत बना रहे, जैसेकि ब्रह्मचर्याश्रम में उन्नत था।
Essence
घर को स्वर्ग बनाने के लिए आवश्यक है कि [क] पुरुष शक्तिशाली हो वीर्यरूप ढालवाला हो। [ख] उसे जीवन का साथी अनुकूल मिले [ग] गृहस्थ को भी ये 'यमराज्य' बनाये रक्खें, अर्थात् गृहस्थ में भी संयम व व्यवस्था से चलें।
Subject
पुमान्