Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Atharvaveda - Mantra 20

Atharvaveda 12/2/20

5 Sukta
55 Mantra
12/2/20
Devata- अग्निः Rishi- भृगुः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- यक्ष्मारोगनाशन सूक्त
Mantra with Swara
सीसे॒ मलं॑ सादयि॒त्वा शी॑र्ष॒क्तिमु॑प॒बर्ह॑णे। अव्या॒मसि॑क्न्यां मृ॒ष्ट्वा शु॒द्धा भ॑वत य॒ज्ञियाः॑ ॥

सीसे॑ । मल॑म् । सा॒द॒यि॒त्वा । शी॒र्ष॒क्तिम् । उ॒प॒ऽबर्ह॑णे । अव्या॑म् । असि॑क्न्याम् । मृ॒ष्ट्वा । शु॒ध्दा: । भ॒व॒त॒ । य॒ज्ञिया॑: ॥२.२०॥

Mantra without Swara
सीसे मलं सादयित्वा शीर्षक्तिमुपबर्हणे। अव्यामसिक्न्यां मृष्ट्वा शुद्धा भवत यज्ञियाः ॥

सीसे । मलम् । सादयित्वा । शीर्षक्तिम् । उपऽबर्हणे । अव्याम् । असिक्न्याम् । मृष्ट्वा । शुध्दा: । भवत । यज्ञिया: ॥२.२०॥

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
१. (सीसे) = [पिञ् बन्धने, ई गतौ, षोऽतकर्मणि] संसार की उत्पत्ति, स्थिति व प्रलय के हेतुभूत ब्रह्म में (मलम्) = मन की सब मैल को (सादयित्वा) = नष्ट करके तथा (उपबर्हणे) = उपासकों की वद्धि के कारणभूत ब्रह्म में (शीर्षक्तिम) = सब सिरदर्दी को समाप्त करके, (अव्याम्) = उस सर्वरक्षक (असिक्न्याम्) = अजर [जरा से पलित न होनेवाले] प्रभु में (मृष्ट्वा) = अपने को शुद्ध बनाकर (शुद्धाः) = पवित्र व (यज्ञियाः) = यज्ञादि कर्मों में प्रवृत्त (भवत) = हो जाओ।
Essence
प्रभु का उपासन हमारे मन की मैल को नष्ट करता है। इस उपासना से संसार हमारे लिए सिरदर्द नहीं बना रहता। उस सर्वरक्षक, अजरामर प्रभु का चिन्तन हमें शुद्ध व पवित्र बना देता है।

 
Subject
शुद्धाः यज्ञियाः