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Atharvaveda - Mantra 15

Atharvaveda 12/2/15

5 Sukta
55 Mantra
12/2/15
Devata- अग्निः Rishi- भृगुः Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- यक्ष्मारोगनाशन सूक्त
Mantra with Swara
यो नो॒ अश्वे॑षु वी॒रेषु॒ यो नो॒ गोष्व॑जा॒विषु॑। क्र॒व्यादं॒ निर्णु॑दामसि॒ यो अ॒ग्निर्ज॑न॒योप॑नः ॥

य: । न॒: । अश्वे॑षु । वी॒रेषु॑ । य: । न॒: । गोषु॑ । अ॒ज॒ऽअ॒विषु॑ । क्र॒व्य॒ऽअद॑म् । नि: । नु॒दा॒म॒सि॒ । य: । अ॒ग्नि: । ज॒न॒ऽयोप॑न: ॥२.१५॥

Mantra without Swara
यो नो अश्वेषु वीरेषु यो नो गोष्वजाविषु। क्रव्यादं निर्णुदामसि यो अग्निर्जनयोपनः ॥

य: । न: । अश्वेषु । वीरेषु । य: । न: । गोषु । अजऽअविषु । क्रव्यऽअदम् । नि: । नुदामसि । य: । अग्नि: । जनऽयोपन: ॥२.१५॥

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Meaning
१. (य:) = जो भी (न:) = हमारे (अश्वेषु) = अश्वों के विषय में, (वीरेषु) = वीर सन्तानों के विषय में और (य:) = जो (न:) = हमारी (गोषु) = गौवों में, (अजाविषु) = बकरियों व भेड़ों में पीड़ा पहुँचानेवाला मांसभक्षी पुरुष है उस (क्रव्यादम्) = मांसाहारी को (निर्गुदामसि) = सुदूर धकेल देते हैं। २. (यः) = जो भी (अग्निः) = अग्नि की भाँति सन्ताप पहुँचानेवाला व्यक्ति (जनयोपन:) = लोगों को विमूढ़ बनानेवाला है-उसको हम दूर करते हैं।
Essence
जो भी मांसाहारी सन्तापक पुरुष घोड़ों, गौवों, भेड़-बकरियों व वीरों को पीड़ित करता है, उसका दूर करना आवश्यक है।
Subject
'जनयोपन' अग्नि को दूर करना