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Atharvaveda - Mantra 59

Atharvaveda 12/1/59

5 Sukta
63 Mantra
12/1/59
Devata- भूमिः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- भूमि सूक्त
Mantra with Swara
श॑न्ति॒वा सु॑र॒भिः स्यो॒ना की॒लालो॑ध्नी॒ पय॑स्वती। भूमि॒रधि॑ ब्रवीतु मे पृथि॒वी पय॑सा स॒ह ॥

श॒न्ति॒ऽवा । सु॒र॒भि: । स्यो॒ना । की॒लाल॑ऽऊध्नी । पय॑स्वती । भूमि॑: । अधि॑ । ब्र॒वी॒तु॒ । मे॒ । पृ॒थि॒वी॒ । पय॑सा । स॒ह ॥१.५९॥

Mantra without Swara
शन्तिवा सुरभिः स्योना कीलालोध्नी पयस्वती। भूमिरधि ब्रवीतु मे पृथिवी पयसा सह ॥

शन्तिऽवा । सुरभि: । स्योना । कीलालऽऊध्नी । पयस्वती । भूमि: । अधि । ब्रवीतु । मे । पृथिवी । पयसा । सह ॥१.५९॥

Meaning
१. (शन्तिवा) = शान्ति-सम्पन्न, (सुरभिः) = उत्तम गन्ध से युक्त, (स्योना) = सुख देनेवाली, कीला (लोध्नी) = अमृतमय रस को-मधु को गाय की भाँति अपने थनों में [ऊधस्] धारण करनेवाली, (पयस्वती) = क्षीर-सम्पन्न (भूमि:) = प्राणियों का निवास स्थान [भवन्ति भूतानि यस्याम्] यह भूमि हो। २. यह (पृथिवी) = प्रथन-[विस्तार]-वाली भूमि (पयसा सह) = अपने ही आप्यायन [वर्धन] के साधनों के साथ मे (अधिनवीतु) = मुझे पुकारे, उसी प्रकार जैसेकि एक माता दूध का गिलास हाथ में लिये हुए एक बच्चे को पुकार रही होती है। यह पृथिवी मुझे भी 'पयस्' प्राप्त कराए।
Essence
यह भूमिमाता हमारे लिए 'शान्ति, सुगन्ध, सुख व पयस्' प्राप्त कराए।
Subject
शान्ति, सुगन्ध, सुख, मधु व पयस्

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