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Atharvaveda - Mantra 56

Atharvaveda 12/1/56

5 Sukta
63 Mantra
12/1/56
Devata- भूमिः Rishi- अथर्वा Chhanda- अनुष्टुप् Suktam- भूमि सूक्त
Mantra with Swara
ये ग्रामा॒ यदर॑ण्यं॒ याः स॒भा अधि॒ भूम्या॑म्। ये सं॑ग्रा॒माः समि॑तय॒स्तेषु॒ चारु॑ वदेम ते ॥

ये । ग्रामा॑: । यत् । अर॑ण्यम् । या: । स॒भा: । अधि॑ । भूम्या॑म् । ये । स॒म्ऽग्रा॒मा: । सम्ऽइ॑तय: । तेषु॑ । चारु॑ । व॒दे॒म॒ । ते॒ ॥१.५६॥

Mantra without Swara
ये ग्रामा यदरण्यं याः सभा अधि भूम्याम्। ये संग्रामाः समितयस्तेषु चारु वदेम ते ॥

ये । ग्रामा: । यत् । अरण्यम् । या: । सभा: । अधि । भूम्याम् । ये । सम्ऽग्रामा: । सम्ऽइतय: । तेषु । चारु । वदेम । ते ॥१.५६॥

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Meaning
१. (ये ग्रामा:) = जो ग्राम, (यत् अरण्यम्) = जो जंगल, (याः सभा:) = जो सभाएँ (अधिभूम्याम्) = इस भूमि पर हैं-ये (संग्रामा:) = जो संग्राम व जो (समितयः) = शान्ति-सभाएँ [Peace conferences] इस पृथिवी पर होती है, (तेषु) = उनमें (ते चारु वदेम) = तेरे लिए सुन्दर ही वचन कहें। २. जब भी हम एकत्र हों, जहाँ भी एकत्र हों, वहाँ प्रभु से उत्पादित इस पृथिवी के महत्व का चर्चण करें। यह चर्चण हमें इस भूमिमाता का स्मरण कराएगा-हमें अनुभव होगा कि हम इस माता के ही तो पुत्र हैं-अतः परस्पर भाई हैं। ऐसा सोचने पर हम द्वेष से दूर व परस्पर प्रेमवाले होंगे।
Essence
हम 'ग्राम, अरण्य, सभा, संग्राम व समितियों में सर्वत्र भूमिमाता का यशोगान करते हुए परस्पर बन्धुत्व का अनुभव करें।
Subject
'ग्राम, अरण्य, सभा, संग्राम व समिति' में भूमिमाता का यशोगान